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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर.
1857 के भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में राजे-रजवाड़ों ने ही नहीं बल्कि हर भारतीय ने किसी न किसी रूप में अपना योगदान दिया था। इसलिए इस बात को स्वीकार नहीं किया जा सकता कि आजादी में कुछ चुनिंदा लोगों का ही योगदान है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की क्रांति संदेश यात्रा के समापन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में परिषद के प्रदेश संगठन मंत्री सुरेन्द्र शर्मा ने मुख्य वक्ता के तौर पर यह विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महापौर विवेक शेजवलकर थे।
रानी लक्ष्मीबाई की समाधि स्थल पर गुरुवार की शाम आयोजित कार्यक्रम में श्री शर्मा ने कहा कि युवा पीढ़ी को 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की वास्तविकता से अवगत कराना आवश्यक है तभी उनमें राष्ट्रहित की भावना जागृत होगी। राम सेतु का उल्लेख करते हुए श्री शर्मा का कहना था कि राम सेतु आस्था का प्रमाण है। इसे तोड़ने का प्रयास करने वाले लोगों के मंसूबे पूरे नहीं होने दिए जाएंगे।
मुख्य अतिथि श्री शेजवलकर ने कहा कि आज देश को स्वार्थो के बलिदान की आवश्यकता है, हम आदर्श की बात करते हैं लेकिन स्वयं उसका पालन नहीं करते। पहले हमें अपने जीवन में आदर्शो को अपनाना होगा। कथनी-करनी का अंतर समाप्त करने की जरूरत है। वही कहें जो करें, वही करें जो स्वयं के विकास के साथ-साथ राष्ट्रहित में हो।
यात्रा के संयोजक दिग्विजय सिंह ने यात्रा के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। अध्यक्षीय उद्बोधन में केपी सिंह, अध्यक्ष जनपद पंचायत मेहगांव ने कहा कि इस तरह की यात्राएं देशभर में निकाली जाना चाहिए जिससे लोगों को स्वतंत्रता आंदोलन एवं शहीदों की कुर्बानियों से अवगत कराया जा सके।
संचालन परिषद के महानगर अध्यक्ष नितेश शर्मा एवं आभार महानगर मंत्री शिवसिंह यादव ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में कुलदीप शर्मा, अंशुल श्रीवास्तव, अतुलकांत, संजय कौरव, प्रवीण भारद्वाज, अतुल भदौरिया आदि उपस्थित थे। जीवाजी विवि स्तर पर यह यात्रा 24 अक्टूबर को शिवपुरी जिले से प्रारंभ हुई थी।