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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. जुलाई से लंबित डीए दिवाली से पहले न दिए जाने के संकेत से कर्मचारियों में जबरदस्त नाराजगी फैल गई है। यूटी चंडीगढ़ के कर्मचारियों में भी आक्रोश फैल रहा है क्योंकि पंजाब सरकार द्वारा डीए दिए जाने के बाद ही यूटी प्रशासन उसी अनुपात में अपने कर्मचारियों को डीए देने की घोषणा करता है।
कर्मचारियों को उम्मीद थी कि सरकार एक-दो दिन में डीए का ऐलान कर देगी। वित्तमंत्री मनप्रीत बादल ने भी इस मुद्दे पर खामोशी साध रखी है। कर्मचारी यूनियनों ने दिवाली से पहले डीए न दिए जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
नॉन गजटेड एंड गजटेड एम्पलाइज ऑर्गनाइजेशन के महासचिव उमा कांत तिवारी ने कहा कि सरकार पहले ही काफी देरी कर चुकी है। सरकारी ड्राइवर यूनियन के प्रधान यादविंदर सिंह ने बताया कि यूनियन दिवाली से पहले डीए न दिए जाने पर प्रदर्शन करेगी। डीपीआई स्कूल्स के प्रधान सुनील कुमार ने बताया कि 7वें दशक में तत्कालीन मुख्यमंत्री लक्ष्मण सिंह गिल के साथ कर्मचारियों का समझौता हुआ था कि केंद्र की घोषणा के बाद उसी पैटर्न पर राज्य सरकार भी डीए की घोषणा करेगी, केंद्र सरकार काफी पहले ही डीए देने की घोषणा कर चुकी है।
लगभग 75 करोड़ का पड़ता है बोझ यदि राज्य सरकार अपने साढ़े तीन लाख कर्मचारियों को डीए की घोषणा करती है तो इससे खजाने पर 75 करोड़ रुपए का सालाना बोझ पड़ता है। कर्मचारी नेता उमा कांत तिवारी ने बताया कि डीए की घोषणा हर साल जनवरी और जुलाई में की जाती है। आम तौर पर राज्य सरकार इसे कर्मचारियों के जीपी फंड में जमा करवा देती है जबकि केंद्र सरकार कैश देती है।