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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. करीब ४-५ लाख की आबादी वाले शहर की सफाई के लिए कम से कम दो हजार कर्मचारियों की आवश्यकता है, जबकि अभी सब मिलाकर मात्र ११ सौ कर्मचारी ही हैं। निगम सीमा क्षेत्र के २९६ किलोमीटर सड़कों व करीब ४ सौ किलोमीटर नाले-नालियों की सफाई के अलावा अतिक्रमण व आवारा मवेशियों की धरपकड़ का जिम्मा भी सफाई अमले पर ही है।
नतीजन, शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। सफाई अमले की कमी के कारण नगर निगम प्रशासन ने अभी से दीवाली की सफाई शुरू करा दी है। कचरे की निकासी बढ़ने से सफाई अमले को रात में भी कचरा संग्रहण करना पड़ रहा है।
निगम के सफाई अमले द्वारा दीवाली पर प्रतिवर्ष विशेष सफाई अभियान चलाया जाता है, लेकिन यह अभियान इस साल अभी से शुरू हो गया है। प्रतिदिन जहां शहर के नुक्कड़ों से १५0 टन कचरा निकलता है, वहीं दीवाली पूर्व सफाई से निकलने वाले कचरे की निकासी २0 टन बढ़कर १७0 टन प्रतिदिन हो गई है।
कचरे पर नियंत्रण के लिए रात में दो एक्सीवेटर लगाकर नुक्कड़ों से कचरे का संग्रहण कर जतिया तालाब से लगे गड्ढे में फिलिंग की जा रही है। सन् १९८१ के पूर्व नगर पालिका के जमाने से निगम के सफाई विभाग में ४0२ पद स्वीकृत थे, इसमें से आधे से कर्मचारी या तो सेवानिवृत्त हो गए या फिर उनकी मौत हो गई, जिससे वर्तमान में विभाग में मात्र २0५ नियमित कर्मचारी ही रह गए हैं।
वहीं शहर की आबादी व कालोनियां इन २६ सालों में कई गुना बढ़ गईं, लेकिन अमले की संख्या बढ़ने के बजाए घटती चली गई। इसके अलावा ९६६ कर्मचारी ठेके, टास्क व मस्टर रोल पर कार्यरत हैं, शहर के अलावा बीडीए की देवरीखुर्द कालोनी की सफाई की जिम्मेदारी भी इन्हीं ११७१ कर्मचारियों पर ही है।
>> अमले की कमी तो है, यही वजह है कि इतनी मेहनत के बाद भी पूरे कचरे का उठाव नहीं हो पा रहा है। दीवाली में शहर चकाचक रहे, इसलिए अभी से रात में भी एक्सीवेटर व अमला लगाकर साफ-सफाई कराई जा रही है।
-डा. ओंकार शर्मा, स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम