मुंबई. बांबे हाईकोर्ट ने जलगांव के बहुचर्चित विश्राम पाटील हत्याकांड की जांच कर रही सीबीआई से कहा कि उसे मामले के आरोपियों का नार्को टेस्ट करने के लिए
कोर्ट से इजाजत लेने की जरूरत नहीं है। इस मामले में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील के भाई को भी आरोपी बनाने की मांग की जा रही है। कोर्ट ने सीबीआई से 14 दिसंबर तक मामले की अगली रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
इस मामले में सीबीआई दो आरोपियों लीलाधर नारखेड़े और दामोदर लोखंडे का नार्को एनालिसिस, ब्रेन मैपिंग और पॉलीग्राफ टेस्ट करना चाहती है। सीबीआई ने गुरुवार को जस्टिस आरएमएस खांडेपारकर और जस्टिस वीके ताहिलरमानी की बेंच के सामने जांच रिपोर्ट पेश करते हुए नार्को टेस्ट की इजाजत मांगी थी।
सीबीआई के वकील सॉलिसिटर जनरल गुलाम वाहनवटी ने अदालत को बताया कि नार्को टेस्ट के लिए सीबीआई की एक अपील जलगांव की अदालत खारिज कर चुकी है। इस पर कोर्ट ने कहा कि ऐसे आपराधिक मामलों में इजाजत लेने की जरूरत नहीं।
क्या था मामला
जलगांव जिला कांग्रेस अध्यक्ष विश्राम पाटील की 21 सितंबर, 2005 को हत्या कर दी थी। उनकी पत्नी रजनी पाटील ने राष्ट्रपति के भाई जीएन पाटील को भी आरोपी बनाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है।