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हाथी को पहले पहाड़ में पांव जमाने होंगे

शिमला. प्रदेश में बसपा की राह चुनौती भरी है। हाथी को यहां चढ़ाई करना आसान नहीं है। बसपा को प्रदेश में पहले पांव जमाने पड़ेगें। इसके बाद ही पार्टी को सरकार बनाने के बारे में सोचना चाहिए।यह राय शहर के प्रबुद्ध लोगों की है। भास्कर ने बसपा के सरकार बनाने के दावों को लेकर लोगों से बात की।

रुठे नेता हैं बसपा में: सोहन लालSohan lalप्रदेश पुलिस के ऑफिसर रैंक से रिटायर हुए सोहन लाल का कहना है कि बसपा का हिमाचल में अस्तित्व नहीं है। उसे अभी अपना जनाधार बनाना पड़ेगा। उनका मानना है कि शाहपुर के तेज तर्रार विधायक कहलाने वाले मेजर विजय सिंह मनकोटिया को मुख्यमंत्री बनने में काफी समय लगेगा। वैसे प्रदेश में बसपा राजनीतिक दलों के रुठे नेताओं की भीड़ हैं।

धीरे-धीरे बनेगी पहचान: केवल कृष्णKewal Krishnaहिमाचल की राजनीतिक पिच पर बसपा नई पार्टी है। उसे यहां सेट होने में समय लगेगा। उनका मानना है कि मनकोटिया में भले ही नेतृत्व क्षमता है, लेकिन उन्हें एकदम सीएम बनने के सपने नहीं देखने चाहिए। बसपा को धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए।

मुश्किल हैं परिस्थितियां: राजRajहिमाचल की राजनीति में कांग्रेस और भाजपा का ही बोलबाला है। बसपा के लिए यहां काफी मूश्किल परिस्थितियां हैं। राज कुमार का कहना है कि बसपा की सरकार बनने की यहां फिलहाल संभावना नहीं है। इसके लिए बसपा को लंबा इंतजार करना पड़ेगा।

थर्ड फंट्र होगी बसपा: धीमानDhimanप्रदेश की जनता ने कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियों का शासन देख लिया है। अब बसपा की बारी है। हो सकता है कि बसपा का सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला काम कर जाए। धीमान का मानना है कि बसपा प्रदेश में थर्ड फंट्र के रुप में उभर सकती है। क्योंकि प्रदेश में बसपा के नेतृत्वकर्ता मनकोटिया ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई है। उनका यह फैक्टर काम कर सकता है।

फिलहाल दस्तक है बसपा की: शुक्लाhuklaयूपी बेस्ड पार्टी की प्रदेश में फिलहाल दस्तक है। उसे अभी पांव जमाने के बारे में सोचना चाहिए। उनका मानना है कि भ्रष्टाचार का मुद्दा प्रत्येक इलेक्शन में गुंजता है। बसपा इस मुद्दे पर चुनाव नहीं जीत सकती। हालांकि प्रदेश की जनता दोनों राजनीतिक दलों की कार्यशैली से उब चुकी हैं, बसपा का सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला भी कारगर साबित नहीं होगा।

बसपा का जनाधार नहीं: रामभगत नेगीRam Bhagat Negiहिमाचल प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस का ठीक- ठाक बोलबाला रहा है। भाजपा जनता के लिए विकल्प के रुप में राजनीतिक पार्टी हैं, जबकि बसपा का यहां कोई जनाधार नहीं है। नेगी का मानना है कि मनकोटिया के मुख्यमंत्री बनने की संभावना काफी कम है।





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