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मस्त चाल छोड़ तेजी से भागेगा हाथी

शिमला. अपनी मस्त चाल को छोड़ हाथी अब तेजी से भागेगा। प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के गठन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद अब गांव-गांव पहुंचने का लक्ष्य है। कार्यकर्ताओं के सामने इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए एक माह का समय दिया गया है।

himachal assembly electionsइसके लिए कार्यकर्ताओं की प्रत्येक जरुरत को पूरा करने का भरोसा दिलाया गया है। हाईकमान ने कार्यकर्ताओं से कहा है कि गांव-गांव तक पहुंच कर छोटी-छोटी सभाएं कर लोगों को बसपा के बारे में जानकारी दें। किस गांव में कितने लोग किस सभा में मौजूद थे इसकी रिपोर्ट ब्लाक अध्यक्ष देंगे।

थिंक टैंक ने बनाई रणनीति
बसपा ने प्रदेश में पांच पूर्व आईएएस व आईपीएस जो पार्टी से जुड़े हैं की एक कमेटी बनाई है। इन पूर्व अधिकारियों को प्रदेश चुनाव की रणनीति बनाने का काम सौंपा गया है। बसपा के इस थिंक टैंक ने अपनी रिपोर्ट हाइकमान को दी है। इसमें कार्यकर्ताओं से गांव स्तर तक पहुंचने को कहा गया है जिसपर हाइकमान ने निर्देश जारी किए हैं। बसपा गांवों में कार्यकर्ताओं के जरिए अपना जनाधार तलाशेगी।

बसपा ने ब्लाक स्तर पर कार्यकर्ताओं से वहां मौजूद दलित लोगों की पूरी जानकारी मांगी है। दलित क्या चाहते हैं और किस पार्टी की तरफ उनका रुझान है इसकी विस्तृत रिपोर्ट जाएगी। साथ ही क्षेत्र में कांग्रेस व भाजपा से रुष्ट नेताओं की सूची भी मांगी गई है। इन्हें बसपा में शामिल करने की कवायद अगले एक माह में होगी।

गाड़ियों का काफिला
बसपा हाइकमान ने प्रदेश में चुनाव प्रचार के लिए 100 वाहनों का काफिला दिया है। यह वाहन अलग-अलग चुनाव क्षेत्र में लगा दिए गए हैं। हाइकमान ने कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया है कि उन्हें जो कुछ भी चाहिए उन्हें उपलब्ध होगा।

बसपा भले ही यूपी में चुनाव के समय धन खर्च नहीं करती है परन्तु हिमाचल में उसे पैसा खर्च करना पड़ रहा है। यहां पहली बार पार्टी अपना जनाधार तलाश रही है इसमें सफल रही तो भविष्य में ज्यादा दिक्कत नहीं होगी। प्रदेश में तीसरी राजनीतिक ताकत की संभावनाएं हैं।





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