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उदयपुर. पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम विद्यार्थियों व युवा पीढ़ी से कहा, कुछ अलग सोचो, खोजो, भ्रमण करो और छिपे रहस्यों को खोलने का साहस करो।
असंभव को संभव बनाने की हिम्मत करो और समस्याओं से भागने की बजाय उसका सामना करने का साहस करोगे तो जरूर सफल होंगे। सही मायनों में यही एक ग्रेजुएट के लिए आवश्यक गुण है।
डॉ. कलाम रविवार को यहां भुवाणा स्थित महाप्रज्ञ विहार में जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय, लाडनूं के पांचवें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। करीब पन्द्रह मिनट के ओजस्वी भाषण के दौरान सभागार में सन्नाटा पसर गया और श्रोता एकटक कलाम को सुनते रहे।
बताया विश्व शांति का मंत्र : कलाम ने कहा कि माता, पिता और यूनिवर्सिटी से नैतिकता प्राप्त होती है। जब नैतिकता व नियमों पर चलने वाला दिल (राइटियस हार्ट) हो तो चरित्र सुंदर बनता है। चरित्र सुंदर हो तो घर में सौहार्द यानी हार्मोनी आती है। घर में हार्मोनी हो तो देश में व्यवस्था रहती है और देश में जब व्यवस्था रहे तभी विश्व में शांति कायम हो सकती है।
परमाणु शक्ति के क्षेत्र में बुलंदियों को छूने वाले वैज्ञानिक कलाम ने अपने भाषण में नैतिकता व सचरित्र को सच्ची बड़ी शक्ति के तौर पर स्थापित किया। उन्होंने कहा कि चरित्रवान नागरिक देश की शक्ति है। जब तक विद्यार्थी ज्ञान के तीन महत्वपूर्ण घटक यानी क्रिएटिविटी, नैतिकता और साहस को साथ लेकर नहीं चलेंगे तब तक सुफल प्राप्त नहीं होगा।
सीखने से आती है रचनात्मकता: डॉ. कलाम ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि लर्निंग से रचनात्मकता आती है। रचनात्मकता सोचने की प्रवृत्ति विकसित करती है। सोचने से ज्ञान बढ़ता है और ज्ञान आपको महान बनाएगा। कलाम ने अंग्रेजी में दिए भाषण के कुछ अंशों को विद्यार्थियों से दोहराने का आग्रह किया, जिस पर युवाओं ने उनके साथ सच्चरित्र व रचनात्मक के कार्य करने का संकल्प लिया।
दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति लालचंद सिंघी ने उत्तराखंड के राज्यपाल बीएल जोशी व प्रो. क्रोमवेल क्रॉफोर्ड को डी-लिट की उपाधि प्रदान की। कुलपति डा.समणी मंगलप्रज्ञा ने 1594 छात्र-छात्राओं को विभिन्न उपाधियों से नवाजा। 38 विद्यार्थियों को पीएचडी की उपाधियां मिली। समारोह में 11 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। स्नातकोत्तर स्तर पर 777 विद्यार्थियों को उपाधि वितरित की र्गई।