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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. ज्योफिजिकल सर्वे सिस्टम इनकापरेरेशन (जीएसएसआई) सड़कों की गहराई तक देखेगी और ठेकेदारों ने गड़बड़ी की है, तो सामने आ जाएगा। पीडब्लूडी ने आज इस सिस्टम का दफ्तर में प्रदर्शन किया। अमेरिका में बनी इस मशीन को फिलहाल आईआईटी मुंबई से मंगवाकर रायपुर-बिलासपुर मार्ग पर टेस्टिंग की गई।
विभाग के विशेष सचिव अनिल राय ने बताया कि इलेक्ट्रो मैग्नेटिक सिस्टम से काम करने वाली ये मशीन सड़क की स्केनिंग 1.5 मीटर गहराई तक कर सकती है। इस मशीन से पता चलता है कि सड़क पर बारीक कंक्रीट (बजरी-डामर) की परत कितनी है, डामरीकरण कितना है, डब्लूबीएम की मोटाई कितनी है और मुरुम की परत कितनी चौड़ी है।
इससे सड़क निर्धारित मापदंडों के अनुरुप बनी है या नहीं और कितनी प्रामाणिक और मजबूत है, यह भी तय हो जाएगा। श्री राय के मुताबिक रोड की स्केनिंग करने के बाद ठेकेदार को भुगतान करने या रोकने में आसानी होगी।
ईएनसी प्रतापसिंह क्षत्री ने बताया कि 45 लाख रु. की यह मशीन आर्डर देने के करीब आठ हफ्ते बाद यहां आ पाएगी। इस महीने एक मशीन का आर्डर दिया जाएगा। फरवरी तक मशीन हमें उपलब्ध हो जाएगी।
श्री क्षत्री के मुताबिक पूरे प्रदेश के लिए चार मशीन अनिवार्य रूप से लगेंगी, जिन्हें प्रत्येक चीफ इंजीनियर आफिस में उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि ये मशीन एक दिन में 40 से 50 किमी रोड तक की स्केनिंग कर सकती है। इसलिए विभाग को अधिक मशीन की जरुरत नहीं होगी।
बिलासपुर रोड की रिपोर्ट निराशाजनक
शनिवार की शाम अंधेरा घिरने के बाद रायपुर-बिलासपुर रोड पर जीएसएसआई मशीन से की गई स्केनिंग के रिजल्ट निराशाजनक रहे। निर्माणाधीन हाईकोर्ट के पास सड़क की एक किमी तक स्केनिंग करने से पता चला कि यहां केवल डामर वाली परत ही ठीक है। नीचे डब्लूबीएम वाली परत पूरी तरह ब्रेक हो चुकी है। इस वजह से इसकी भारवाहन क्षमता काफी कम हो गई है। ऐसा क्यों?
इस सवाल के जवाब में श्री राय का कहना है कि रायपुर-बिलासपुर रोड पहले स्टेट हाइवे था, जिसे बिना किसी तैयारी नेशनल हाइवे में तब्दील कर दिया गया। हम नेशनल हाइवे की सड़कों पर पैसा खर्च कर मरम्मत नहीं कर सकते।