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बैठे-बैठे लुट गईं, ट्रेन पर चढ़ी खुशियां

जोधपुर. गाड़ी के बाहर घोर अंधेरा समय के इतिहास के समान था। हवा इस तरह सांय-सांय कर रही थी, जैसे समय के पहलू में बैठकर रो रही हो। बाहर ऊंचे-ऊंचे odhदरख्त, दुखों की तरह उगे हुए थे। कई जगह पेड़ नहीं होते थे, केवल एक वीरानी होती थी, वीरानी के ये टीले यकीनन टीलें नहीं, खुशियों की कब्रें लग रहीं थीं। पाकिस्तान से शनिवार सुबह चली थार एक्सप्रेस में कई यात्री ऐसे भी थे जिन्होंने विभाजन का दुख झेला था। लाशें देखी थीं। लाशों जैसे लोग देखे थे। जोधपुर में ट्रेन से उतरते ही ऐसे लोगों ने कहा अब दुखों की कहानियां कह-कहकर हम थक चुके हैं, और लगता है ये कहानियां उम्र से पहले खत्म होने वाली नहीं हैं।

जम्हूरियत तो देखी ही नहीं
जोधपुर पहुंचे लोगों ने कहा कि पाकिस्तान के सूरते हाल बेहद खराब हो गए हैं। जम्हूरियत (लोकतंत्र) तो साठ सालों में देखने को नहीं मिली। अब इमरजेंसी और लग गई।

थार एक्सप्रेस से हिंदुस्तान आते समय ही इनको खबर मिल गई कि उनके देश में इमरजेंसी लग गई है। यह सुनते ही हर चेहरे पर दहशतकी छाया नजर आने लगी। रविवार सुबह 7 बजे थार एक्सप्रेस जोधपुर के प्लेटफार्म नंबर 4 पर आकर रुकी तो रिश्तेदारों से गले मिलते समय यात्रियों के चेहरों पर खुशी तो थी, मगर उसमें आशंका भी साफ झलक रही थी।

अगवानी के लिए आए परिजनों व मित्रों को देखकर इनकी आंखें नम हो र्गई। कुछ ने रिश्तेदारों से ही पाकिस्तान के हाल जाने। हर कोई पाकिस्तान के भविष्य के प्रति चिंतित दिखाई दे रहा था। ये लोग करीब एक माह तक हिंदुस्तान में रुकने के लिए आए हैं, मगर इस बात से भी परेशान हैं कि पाकिस्तान में हालात बिगड़े तो उन्हें परिजनों को संभालने के लिए वक्त से पहले ही यहां से रुखसत होना पड़ेगा। भारत पहुंच खुली हवा में श्वास लेने के बाद अधिकांश पाक नागरिकों ने इमरजेंसी के कदम को गलत ठहराते हुए कहा कि इससे देश में अस्थिरता और बढ़ेगी।

इमरजेंसी से देश टूट जाएगा
जनरल परवेज मुशर्रफ के तानाशाह रवैये से पाकिस्तान के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। कराची निवासी सैय्यद अहमद ने कहा कि पाकिस्तान बिखरा हुआ देश है। इमरजेंसी से वह और टूट जाएगा। मुशर्रफ अपनी गद्दी मजबूत करने के लिए देश को तोड़ने पर आमादा हैं।

हाजी कुल्ला खान भी यही सोचते हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान के लोग मजबूर हैं, आगे क्या होगा, यह सोचकर हर कोई आशंकित है। यह घोर संकट का दौर है, खुदा खैर करे। बुजुर्ग शाहिद अहमद के खयाल भी कमोबेश ऐसे ही हैं। उन्होंने साफ कहा कि पिछले साठ सालों में तो उन्होंने पाकिस्तान में जम्हूरियत देखी नहीं, अल्लाह से दुआ करते हैं कि आगे सब ठीक हो जाए। हालात दिनोंदिन बिगड़ते ही जा रहे हैं। कराची निवासी शरीफ यूसुफ का मानना है कि इससे देश में तनाव व अस्थिरता बढ़ेगी। कब, क्या हो जाए, यह कोई नहीं कह सकता है।





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