HomeNewsMadhya PradeshGwalior Gwalior

वकीला गैंग ने किया तिघरा क्षेत्र में नरसंहार

ग्वालियर.killings दीपावली से पांच दिन पहले डकैत वकीला गुर्जर गैंग नरसंहार को अंजाम देकर पुलिस को चुनौती दे गया। वकीला ने तिघरा थानाक्षेत्र की हद में लखनपुरा गांव के पास स्थित प्रताप की पुलिया पर तीन राजस्थानी चरवाहों की हत्या कर दी। चरवाहे जिला पाली, राजस्थान के बताए जाते हैं जो कोटा-श्योपुर सीमा से मवेशी चराने के लिए मध्यप्रदेश में आए थे।

जानकारी के अनुसार तिघरा पुलिस को सुबह लगभग दस बजे सूचना मिली थी, कि लखनपुरा गांव से कुछ दूरी पर स्थित प्रताप की पुलिया पर तीन युवकों की रक्त-रंजित लाश पड़ी हुई है, इस सूचना पर एसओ तिघरा जेपी भट्ट पुलिस फोर्स को लेकर मौके पर पहुंचे। घटनास्थल देखकर पुलिस जवानों को पसीना आ गया।

मौके पर जिन तीन युवकों की लहूलुहान लाशें पड़ीं थीं, उनके हाथ-एक दूसरे बंधे थे तथा घटनास्थल पर आधा दर्जन से अधिक 315 और 12 बोर के खाली खोखे पड़े थे। पुलिस ने घटनास्थल के नजदीक स्थित लखनपुरा और झाला गांव के ग्रामीणों को बुलाकर मृत युवकों की शिनाख्त कराने की कोशिश की लेकिन शिनाख्त कराने में पुलिस को सफलता नहीं मिली।

इसके बाद पुलिस ने मृतकों की जेबें टटोलीं तो इनकी शिनाख्त होने लगी। तीनों मृतकों की डायरियों में मिलने नाम के आधार पर मृतक चेतराम, गुमान सिंह और भीम सिंह बताए गए। इनकी डायरियों से मिले फोन नंबरों के आधार पर इनकी सही शिनाख्त शाम को हो पाई।

एसपी वीके सूर्यवंशी के मुताबिक मृतक चेनाराम पुत्र बोधाराम रेवाड़ी, मानिकराम पुत्र हरलाल रेवाड़ी, सियाराम पुत्र दारूराम जाट निवासी ग्राम डिगना थाना जयतारण जिला पाली, राजस्थान हैं। कोटा-श्योपुर के रास्ते ये लोग मध्यप्रदेश की सीमा में दाखिल हुए होंगे।

शिवपुरी जिले के पोहरी में बीजा का डेरा से डकैत गैंग ने इनका अपहरण तीन-चार दिन पहले कर लिया था। घटना की जानकारी मिलते ही एडीशनल एसपी मंगलसिंह, एसडीओपी घाटीगांव रामलाल बड़ोलिया, एसओ घाटीगांव संजीव नयन शर्मा, फोरेंसिक एक्सपर्ट अखिलेश भार्गव मौके पर पहुंच गए।

अपहृत को बैल बनाया
डकैत वकीला गैंग ने अपहृतों पर अत्याचार की हद कर दी थी, इन्होंने अपहृतों की हत्या तो हाथ बांधकर की थी, साथ एक अपहृत की नाक में छेद कर नकेल डाल दी थी। नकेल कुछ दिनों पहले डाली गई होगी क्योंकि नाक के छेदों पर त्वचा आ गई है और फिलहाल उनमें खून भी नहीं निकल रहा है। पुलिस को इस युवक की कुहनी और घुटने पर छिलने के निशान मिले हैं, इससे भी यह बात कन्फर्म होती है कि डकैतों ने उसे बैल की तरह चलाया होगा।

गड़रिया के रास्ते पर वकीला गैंग
वकीला गुर्जर गैंग ने दुर्दात दयाराम-रामबाबू गड़रिया गैंग का तरीका इस नरसंहार में अपनाया है। वकीला अपहृतों से ठीक उसी तरह से पेश आया जिस तरह से गड़रिया गैंग आया करता था। उसने अपहृतों के हाथ बांधकर उन्हें गोली मारी। वकीला ने अपहृतों को गोलियां पेट और पीठ से सटाकर मारीं। ठीक ऐसा ही गड़रिया गैंग ने मोहना थानाक्षेत्र के भंवरपुरा में हुए नरसंहार में किया था।

उसने गुर्जर समुदाय के तेरह युवकों को लाइन से खड़ा किया, उनके हाथ बांधे और बिल्कुल नजदीक से गोलियां मार दीं। इसके पहले करसेना और इसके बाद गोपालपुरा में भी गड़रिया गैंग ने दुर्दातता से वारदात को अंजाम दिया था। गड़रिया गैंग का एक अंदाज यह भी था कि वह हत्याएं करने के बाद मौके पर चिट्ठी छोड़ जाता था, चिट्ठी वकीला गैंग ने भी आधी-अधूरी लिखी छोड़ी है लेकिन इसमें फिरौती मांगे जाने का उल्लेख नहीं है।

गड़रिया गैंग की एक खासियत यह भी थी कि वह दो जिलों की सीमा पर वारदात को अंजाम देता था, ठीक यही वकीला गैंग ने भी किया। वकीला ने जिस जगह वारदात को अंजाम दिया, वह भी दो जिलों की सीमा थी।

घटनास्थल प्रतापपुरा की पुलिया से एक रास्ता पनिहार, दूसरा तिघरा तथा तीसरा रास्ता मुरैना जिले के जौरा तहसील की ओर जाता है। गड़रिया र्गैंग ने भी भंवरपुरा का नरसंहार किया था, वह जगह तीन जिलों की सीमा था। भंवरपुरा से मुरैना का गसवानी क्षेत्र तथा शिवपुरी का सुभाषपुरा नजदीक ही था।

एक चरवाहा डकैतों के कब्जे में
वकीला गुर्जर गैंग ने तीन नहीं बल्कि चार को चरवाहों को बीजा का डेरा से उठाया था। इनमें से तीन चरवाहों को पुलिस ने मौत के घाट उतार दिया, जबकि एक चरवाहा अभी डकैतों के कब्जे में है। डकैतों के कब्जे में चरवाहे का नाम बन्नेराम बताया जाता है।

पोहरी में अपहरण का मामला दर्ज नहीं
जिन तीन युवकों को वकीला गैंग ने लखनपुरा में मार डाला, उनकी डायरी से मिली चिट्ठी से पुलिस ने यह तो पता लगा लिया है कि इनका अपहरण पोहरी थानाक्षेत्र में चरवाहों के डेरे से किया गया है। लेकिन पोहरी थाने में अपहरण का कोई मामला दर्ज नहीं है। पोहरी थाने में अपहरण थाने से मृतकों की शिनाख्त न होने से पुलिस परेशान है।

चिट्ठी से हुई वकीला गैंग की शिनाख्त
पुलिस को एक मृतक की जेब से जो डायरी मिली, उससे खुलासा हुआ कि यह करतूत वकीला गुर्जर गैंग की है। चिट्ठी में वकीला, उसके भाई पप्पू मुखिया और दीवान सिंह के नाम के उल्लेख हैं, इन्होंने अपहृतों के बारे में लिखा है कि इनका बीजा का डेरा से अपहरण किया था।

चिट्ठी की शुरुआत काली मां के जयकारे से की गई है। चिट्ठी में फिरौती की रकम का खुलासा नहीं किया गया है। यह चिट्ठी 18 सितंबर को लिखी गई है। पुलिस का अनुमान है कि वकीला गैंग ने अपहरण की वारदात को इससे पहले अंजाम दिया होगा।

इनाम पच्चीस हजार, मप्र-राजस्थान में सक्रिय
मूलत: मुरैना के देवगढ़ थानाक्षेत्र में रहने वाले वकीला गुर्जर पर पुलिस की ओर से 25 हजार रुपए का इनाम घोषित है।

नेल पॉलिश का क्या रहस्य
पुलिस को घटनास्थल से नेल पॉलिश की एक शीशी भी मिली है, यह किसकी है, इसको लेकर पुलिस अभी कयास लगा रही है। पुलिस का अनुमान यह भी है कि वकीला गैंग के साथ कोई महिला भी है, पुलिस को इस गैंग के साथ महिला के होने की सूचना कुछ दिनों पहले भी मिली थी।

वाहन से उतारा ही नहीं डॉग, सर्चिग भी देर से
वकीला गैंग तिघरा थानाक्षेत्र में सामूहिक नरसंहार को अंजाम देकर भाग निकला, पुलिस को जानकारी सुबह दस बजे मिली। पुलिस मौके पर तुरंत पहुंच गई लेकिन इसके बाद उसकी कार्रवाई धीमी गति से चली। मौके पर पहुंचे पुलिस अफसरों ने सर्चिग के लिए पुलिस फोर्स देहात के थानों से मंगाया था।

लगभग बीस जवान मौके पर पहुंच गए लेकिन यह जवान घटनास्थल पर पहुंचकर दो घंटे तक चहलकदमी करते रहे, अफसरों की ओर से इन्हें सर्चिग का निर्देश मिला नहीं और उन्होंने खुद भी इस काम में रुचि दिखाई नहीं। पुलिस अफसरों ने घटना की गंभीरता को समझते हुए डॉग स्क्वाड भी मौके पर बुला लिया। यह डॉग स्क्वाड भी गाड़ी में बैठा-बैठा लौट आया।

इस मामले में भी यही हुआ, डॉग स्क्वाड को अफसरों ने निर्देशित नहीं किया और डॉग मास्टर ने डॉग को गाड़ी से नीचे उतारकर सुराग ढुंढ़वाने की जहमत नहीं उठाई। इस संबंध में पुलिसकर्मियों का कहना था कि चूंकि घटनास्थल छह से बाहर घंटे पुराना हो चुका है, इसलिए डॉग को गंध मिलना मुश्किल है।

एडी मूवमेंट में ढिलाई का नतीजा
गड़रिया गैंग के खात्मे के बाद पुलिस ने एडी मूवमेंट में ढिलाई बरती है, इन दिनों रुटीन सर्चिग भी बंद हो चुकी है। पुलिस ने सर्चिग की तो अफसरों ने भी एडी मदों में कमी करना शुरू कर दी।

सूत्र बताते हैं कि पिछले कई महीनों से देहात पुलिस को एडी मद से मिलने वाला डीजल नहीं मिला है, ऐसे में पुलिस को जब भी किसी डकैत गैंग के क्षेत्र में होने की सूचना मिलती है तो डीजल या तो उधारी पर लिया जाता है या फिर कि थाना प्रभारी की जेब से पैसा जाता है। रुटीन सर्चिग में पुलिस की ढिलाई की वजह से डकैत गिरोहों को मौका मिला और उन्होंने देहात में अपनी उपस्थित दर्शा दी।

जब तक था गड़रिया गैंग, डरा रहता था वकीला
वकीला गुर्जर गैंग, रामबाबू-दयाराम गड़रिया गैंग का समकालीन है। पिछले दस वर्षो में गड़रिया गैंग का आतंक ग्वालियर, शिवपुरी और श्योपुर जिले में था। पुलिस सूत्रों के अनुसार उन दिनों गड़रिया गैंग ने फरमान यह भी जारी किया था कि शिवपुरी और ग्वालियर क्षेत्र में कोई गुर्जर गैंग आई तो वे उसका खात्मा कर देंगे।

गड़रिया गैंग के इस फरमान के कारण वकीला गैंग भयभीत था और वह ग्वालियर-शिवपुरी क्षेत्र में आने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। गड़रिया गैंग का खात्मा होने के बाद इसकी गतिविधियां इस क्षेत्र में बढ़ने लगीं।

मुरैना-धौलपुर है मुख्य ठिकाना
वकीला गैंग के सदस्य ग्वालियर और शिवपुरी में वारदात करने के बाद मुरैना के खुलावली गांव में ये शरण लेते थे जबकि धौलपुर में डकैत गैंग के सदस्य डांग-बसई और नगर बिहारी का पुरा में शरण लेते थे। पुलिस को यह भी पता चला है कि इस क्षेत्र में गैंग के सदस्यों ने मकान भी खरीद रखा है।

गैंग का मुखिया वकीला गुर्जर है तथा गैंग मेम्बरों में इसके छह भाई रामवीर, दीवान, ब्रजेन्द्र, पप्पू और राकेश शामिल हैं। इनमें से रामवीर, वकीला और दीवान पर इनाम घोषित है। वकीला पर राजस्थान, चंबल रेंज और ग्वालियर रेंज का इनाम है जबकि रामवीर और दीवान पर चंबल रेंज ने इनाम घोषित किया है।

क्या कारण हो सकता है निर्ममता से मारने का?
वकीला गुर्जर गैंग ने राजस्थानी चरवाहों की हत्या क्यों की होगी, इस बारे में भी पुलिस ने मंथन किया। पुलिस अफसरों का कहना है कि कुछ दिन पहले शिवपुरी में रेवाड़ियों ने वकीला गैंग के एक सदस्य को पुलिस से पकड़वा दिया था। अफसरों को संभावना है कि रेवाड़ियों की हत्या के पीछे कहीं मुखबिरी के शक में तो नहीं की गई है।

संभावना यह भी है कि वकीला गैंग राजस्थान से आने वाले चरवाहों से वसूली करता रहता है, उसने मृतकों से भी वसूली करना चाही होगी, मृतकों ने डकैतों के भय के कारण रुपए देने के लिए हामी भर दी होगी लेकिन वे रुपए देने में असमर्थ रहे होंगे, इससे खफा डकैत गैंग ने इनका अपहरण कर लिया। तीन दिन अपने साथ रखकर इन्हें यातनाएं दीं और इसके बाद इनकी हत्या कर दी।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: