HomeNewsMetrosIndore Indore

दो एफआईआर फिर भी कार्रवाई नहीं

इंदौर. वर्षो पुलिस फायर ब्रिगेड के प्रमुख अधीक्षक रहे बनेसिंह (बीएस) टोंगर के खिलाफ दो-दो एफआईआर होने और कोर्ट के निर्देश के बाद भी कार्रवाई नहीं की जा रही है। वे पुलिस मुख्यालय की ट्रेनिंग ब्रांच में बतौर ओएसडी जमे हैं। हाल में हाईकोर्ट ने जनवरी तक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

श्री टोंगर के खिलाफ धोखाधड़ी तथा शासकीय अधिकारी होते हुए लाखों का चंदा जमा करने के आरोप में एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच भी पूरी हो चुकी है। 2003 में शिकायतें मिलने पर पुलिस मुख्यालय ने उन्हें प्रमुख अधीक्षक फायर पद से हटाकर भोपाल पदस्थ कर दिया था।

उनके विरुद्ध फायर ब्रिगेड के ही निरीक्षक रामसिंह निंगवाल ने दोनों आरोप लगाए थे। प्राथमिक जांच में आरोप साबित होने पर उनके विरुद्ध दो अलग-अलग एफआईआर भी दर्ज हुई थी।

यह है मामला
एफआईआर के मुताबिक 1985 में दिल्ली में फायर सुपरवाइजर रहते श्री टोंगर ने एसपी इंदौर बी.के. गदाले को डीएसपी पद पर प्रतिनियुक्ति पर आने का आवेदन किया था। गलत जानकारियां देकर वे इंदौर आए और सालभर बाद स्थायी पद ले लिया। 2000 में श्री निंगवाल को पता चला तो उच्चधिकारियों से शिकायत की।

इस पर श्री टोंगर के विरुद्ध आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) भोपाल में धारा 420, 467, 468 तथा 471 के तहत मुकदमा कायम हुआ। इसी दौरान पता चला उन्होंने 1999 में एक सेमिनार के लिए होटल मालिकों तथा अन्य व्यापारियों से लाखों रुपए चंदा वसूला। इसकी जांच ईओडब्ल्यू के डीएसपी राजेशसिंह बिसेन ने की और 2005 में धारा 13 (बी), 13 (डी), (11), 13 (2) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया।

बने हुए हैं पद पर
संगीन आरोपों के बाद भी पुलिस मुख्यालय ने टोंगर को डीएसपी स्तर का पद दे रखा है जिसकी तनख्वाह 23,000 रुपए प्रतिमाह होती है, जबकि वे फायर सुपरवाइजर रहते तो मासिक वेतन 6,000 से ज्यादा नहीं होता।

मामलों में कार्रवाई नहीं
भंडाफोड़ करने वाले श्री निंगवाल ने कार्रवाई में ढिलाई को लेकर जुलाई में हाईकोर्ट में शिकायत की। कोर्ट ने ईओडब्ल्यू को जनवरी तक चालान पेश करने के निर्देश दिए। यह जानकारी श्री निंगवाल ने दी।

चंदा वसूली विधि विभाग में
डीएसपी श्री बिसेन ने बताया चंदा वसूली के मामले में कार्रवाई की अनुमति के लिए दस्तावेज विधि विभाग को भेजे हैं। निर्देश आने के बाद ही कार्रवाई हो पाएगी। धोखाधड़ी का मामला विभाग की ढिलाई से आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

खारिज हो चुके मामले
श्री टोंगर ने बताया मामले उठे जरूर थे, लेकिन वे निदरेष हैं। सारे मामले खारिज हो चुके हैं। ईओडब्ल्यू के आईजी पी.एम. मोहन ने बताया दोनों मामलों की मुझे पूरी जानकारी नहीं है। जांच करवा रहा हूं।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: