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भोपाल. शहर में खून का अवैध कारोबार एक बार फिर उफान पर है और इसमें करीब एक हजार से अधिक प्रोफेशनल ब्लड डोनर जुटे हैं। अधिकांश ब्लड बैंकों पर ये प्रोफेशनल डोनर बड़ी आसानी से मिल जाते हैं। इतना ही नहीं, कुछ ब्लड बैंक तो खुद भी प्रोफेशनल डोनर उपलब्ध कराते हैं।
मुश्किल है कानूनी तरीके से ब्लड लेना
कानूनी तौर पर ब्लड लेने में कई मुश्किलें हैं। इसमें जरूरतमंद को लिए गए ब्लड के बदले में दूसरे ग्रुप का ब्लड उतनी ही मात्रा में देना होता है। ऐसी स्थिति में जरूरतमंद को एक ब्लड डोनर की जरूरत पड़ती है। रिप्लेसमेंट न होने की स्थिति में ब्लड बैंक ब्लड देने से इंकार कर देता है। इसलिए यदि जरूरतमंद के पास कोई ब्लड डोनर नहीं है, तो सिर्फ प्रोफेशनल डोनर का ही सहारा बचता है।
शहर में 1000 से अधिक प्रोफेशनल डोनर
सिटी बैंक के ट्रस्टी व भोपाल ब्लड बैंक के संचालक साजिद खान का कहना है कि हजार से अधिक लोगों का एक पूरा सर्कल बना हुआ हैं। ये अवैध रूप से ब्लड डोनेट करते हैं। इसकी रोकथाम के लिए पुलिस को कार्रवाई करना चाहिए।
अवैध ब्लड डोनेशन के खतरे
अवैध तरीके से ब्लड डोनेशन के कई प्रकार के खतरे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक ऐसे मामलों में ब्लड की प्रॉपर जांच नहीं हो पाती। वहीं प्रोफेशनल डोनर महीने में दो-तीन बार ब्लड डोनेट करते हैं, जिसके कारण ब्लड पतला हो जाता है। जबकि नियमानुसार तीन महीने में एक बार ही ब्लड देना चाहिए। विशेषज्ञ मानते हैं कि कुछ बीमारियों के शुरूआती लक्षण ब्लड की जांच के समय थोड़ी-सी लापरवाही होने पर भी पकड़ में नहीं आ पाते, इससे भी खतरा रहता है।
ब्लड बैंक ही उपलब्ध कराते हैं लिस्ट
शहर में कुछ निजी ब्लड बैंक जरूरतमंद को खुद प्रोफेशनल ब्लड डोनर की लिस्ट उपलब्ध करा देते हैं। ये डोनर डेढ़ से दो हजार रूपए लेकर ब्लड देने को तैयार हो जाते हैं। खुद ब्लड बैंक के कुछ लोग इनसे ‘सेटिंग’ करा देते हैं। वहीं दूसरी तरफ सरकारी ब्लड बैंकों के आस-पास से प्रोफेशनल डोनर खुद जरूरतमंद को तलाशते हैं।
छापे पड़े, पुलिस कार्रवाई भी हुई
खून के अवैध कारोबार की रोकथाम के लिए 2006 में ब्लड बैंकों पर छापे भी पड़े थे। इसके बाद 2007 में भी जहांगीराबाद और तलैया थाने में ऐसे प्रोफेशनल डोनर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
क्या कहते हैं प्रोफेशनल ब्लड डोनर
हम्माली का काम करने वाले रामशरण बताते हैं कि लोगों की जरूरत के हिसाब से मैं खून देने चला जाता हूं। इसी तरह रिक्शा चालक घनश्याम बताते हैं कि कई बार तो महीने में दो-तीन बार खून दे देता हूं। मजदूरी करने वाले गुमान सिंह का कहना है कि पहले मैं महीने में दो-तीन बार खून दे देता था लेकिन पिछले कुछ दिनों से कमजोरी महसूस होने के कारण मैंने ये काम बंद कर दिया है।