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भोपाल.
राजधानी के सबसे व्यवस्थित माने जाने वाले बाजार न्यू मार्केट में यदि दुर्घटनावश आग लग जाए, तो फायर ब्रिगेड भी भीतर नहीं आ सकती। मार्केट में व्याप्त अतिक्रमण के कारण यह स्थिति निर्मित हुई है। पुराने शहर के बाजारों के हालात तो पहले से बदतर हैं।
दीपावली में महज कुछ दिन ही बाकी है, ऐसे में न्यू मार्केट समेत पुराने शहर के सराफा चौक, लखेरापुरा, इब्राहिमपुरा, मारवाड़ी रोड बाजारों में भीड़भाड़ का माहौल है। अतिक्रमण और हाथ ठेलों से भरे इन व्यस्ततम बाजारों में जहां रोजाना हजारों लोगों का आना-जाना होता है, वहां एहतियात के तौर पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं।
अतिक्रमण बना मुसीबत:
न्यू मार्केट में हाथ ठेलों पर लगने वाली दुकानों की भरमार के कारण मार्केट भारी अतिक्रमण की चपेट में है। हादसे के समय यह अतिक्रमण मुसीबत का सबब बन सकता है। न्यू मार्केट में इक्का-दुक्का दुकानों को छोड़ किसी में भी सीजफायर नहीं है। पुराने शहर के बाजारों में संकरी गलियों में काबिज दुकानों का आलम यह है कि हादसे के वक्त इन बाजारों में न तो दमकलें प्रवेश कर सकती हैं और न पुलिस वाहन और एंबुलेंस।
यहां तक की भारी भीड़ के कारण लोगों का पैदल चलना तक मुश्किल है। न्यू मार्केट युवा व्यापारी संघ के अध्यक्ष दयाल आरतवानी के अनुसार इस स्थिति से निपटने के लिए कम से कम त्योहार के समय अस्थायी दुकानों को बाजार से बाहर कोई जगह आवंटित किया जाना चाहिए।
भोपाल व्यापारी महासंघ के प्रवक्ता अनुपम अग्रवाल मानते हैं कि पुराने शहर के बाजार सकरी गलियों में हैं। अग्निकांड जैसे हादसों में यहां भगदड़ मच सकती है। इससे निपटने के कोई भी कारगर इंतजाम व्यापारियों के पास नहीं हैं। मार्केट में बाजारों में प्रवेश के लिए चार रास्ते हैं, लेकिन इन संकरे मार्गों में से हादसे के वक्त दमकल वाहनों का प्रवेश टेढ़ी खीर है।
>> त्योहार के मद्देनजर शहर के प्रमुख व पटाखा बाजारों में फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के साथ दमकलकर्मी तैनात किए जाएंगे। एहतियात के तौर पर दुकानदार अपने प्रतिष्ठान में अग्निशमन यंत्र रखें।
-इफ्तेकार अहमद, फायर आफिसर
पार्किग की दिक्कत
इन सभी बाजारों में नगर निगम द्वारा घोषित रूप से वाहन पार्किग के लिए कोई जगह निर्धारित नहीं की गई है। जिसको जहां जगह मिलती है, वह अपनी वाहन पार्क कर देता है। पुलिस की आंख बचाकर जब कोई कार, जीप या आटो इन बाजारों में प्रवेश कर जाता है, तो उस मार्ग पर रास्ता काफी देर तक के लिए जाम हो जाता है।
बाजारों की समस्याएं
अनेक व्यापारियों ने अपने ओटले आगे तक बढ़ा रखे हैं।
कई कपड़ा दुकानदार बांस या लोहे की छड़ के जरिए दुकान के काफी आगे तक कपड़े लटकाते हैं।
इन बाजारों में करीब दो सौ से अधिक ठेलों पर सामान बेचा जाता है।
सोमवारा से लखेरापुरा मार्ग ठेलों के कारण पैदल चलने लायक तक नहीं बचता।
फैसले पर अमल नहीं
गत वर्ष अनेक व्यापारी संगठनों, फायर ब्रिगेड अधिकारियों और अतिक्रमण विरोधी अमले के अफसरों की संयुक्त बैठक में निर्णय लिया गया था कि बाजारों से व्यापारी अपने अतिक्रमण स्वयं हटा लेंगे। ठेला दुकानदारों की संख्या सभी बाजारों में निर्धारित की जाएगी। सिर्फ लाइसेंसधारी ठेले ही लगेंगे। व्यापारी दस-दस दुकानें छोड़ कर अग्निशमन यंत्र और रेत से भरी बाल्टियां भर कर रखेंगे, लेकिन यह सब नहीं हुआ।
इन पर गौर करें दुकानदार
दुकान में अग्निशमन यंत्र जरूर रखें
रात को दुकान पर जलता दीपक छोड़कर घर न जाएं
दुकान में ज्वलनशील पदार्थ का स्टाक न भरें
बिक्री के बाद पैकिंग का कागज, रूई व अन्य कचरा बाहर फेंके
घर जाते समय मेन स्विच आफ करें
बिजली की ओवर लोडिंग न करें
बिजली के तार और स्विच बोर्ड पर अच्छे से टेपिंग करें।