Breaking News 
bhaskar Web English


HomeNewsPunjabJalandhar Jalandhar

..तो हिसाब-किताब का ऑडिट करवाना जरूरी

इनकम टैक्स कानून 1961 की धारा 44 एवी के अनुसार यदि गत वर्ष के टैक्स पेयर की कुल बिक्री 40 लाख से अधिक है, तो उसे अपने हिसाब किताब का आडिट करवाना होगा। आडिट केस में रिटर्न भरने की लास्ट डेट 31 अक्तूबर होती है जो इस साल ई-फाइलिंग करने वालों के लिए 15 नवंबर हो गई है।

अगर कोई आडिट नहीं करवाता तो उसे धारा 271 बी के अधीन जुर्माना हो सकता है। इसके लिए 40 लाख की बिक्री का हिसाब लगाते हुए कुछ चीजों का ध्यान रखना होता है। जॉब कैटेगरी में काउंट होनी वाली इन्कम इसमें शामिल होगी। जॉब वर्क के मूल्यों को जोड़कर टैक्सपेयर की बिक्री 40 लाख से अधिक हो गई है तब भी टैक्स पेयर को आडिट करवाना होगा।

इसी तरह यदि हैड आफिस एवं ब्रांच आफिस दोनों की बिक्री मिलाकर 40 लाख क्रास होती है तो भी आडिट करवाना होगा। ठेकेदार के केस में 40 लाख के काम का हिसाब लगाते समय वर्क इन प्रोग्राम का मूल्य नहीं जुड़ेगा। ट्रांसपोर्ट एजेंट के केस में चालीस लाख रुपए का हिसाब लगाते समय कमीशन ही जुड़ेगा क्योंकि एजेंट से वसूला हुआ पूरा किराया ट्रक वाले को दे दिया जाता है। यह वसूली एजेंट की मानी जाएगी। यदि टैक्सपेयर की बिक्री से कैश डिस्काउंट निकलने के बाद 40 लाख रुपए से कम है तो आडिट करवाना जरूरी नहीं है।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: