|
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने अहम व्यवस्था देते हुए कहा कि किसी के घर या परिसर में कूड़ा-कचरा फेंके जाने की स्थिति में अचानक तीव्र गुस्सा आना स्वाभाविक है और ऐसी स्थिति में हत्या करने वाले को हत्या का दोषी नहीं माना जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक इसी तरह के विवाद के चलते हत्या करने वाले को दी गई उम्रकैद की सजा को कम करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में हत्या का दोष नहीं माना जाना चाहिए। जस्टिस एके माथुर और जस्टिस मरकडेय काटजू ने यह फैसला देते हुए कहा कि हमार विचार से किसी के मकान या दुकान में व्यर्थ पदार्थ फेंकना जायज नहीं है बल्कि एक भड़काने वाला काम है क्योंकि हर व्यक्ति अपना परिसर साफ-सुथरा रखना चाहता है। ऐसी स्थिति में अपना आपा खो बैठना स्वाभाविक है।
9 अप्रैल 1998 के एक मामले के मुताबिक तमिलनाडु के एक पेपर व्यापारी के कर्मचारी मुतु ने शिवा नामक एक व्यक्ति की हत्या तब कर दी थी जब शिवा ने उसकी दुकान में गंदा सामना फेंका था और विवाद बढ़ गया था। सुप्रीम कोर्ट ने मुतु की उम्रकैद की सजा को आज पांच साल के कठोर कारावास में बदल दिया।