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अहमदाबाद.
अगले साल के बाद से गांधी साहित्य महंगा हो सकता है क्योंकि भारतीय कॉपीराइट कानून के अनुसार गांधी साहित्य का कॉपीराइट 31 दिसंबर 2008 को खत्म हो रहा है। इसके बाद अन्य प्रकाशकों को गांधी साहित्य के प्रकाशन की छूट मिल जाएगी। इस साहित्य में बापू की आत्मकथा, पत्र और लेख शामिल हैं।
कोई भी छाप सकेगा साहित्य
फिलहाल महात्मा गांधी द्वारा रचित तमाम साहित्य का कॉपीराइट नवजीवन ट्रस्ट के पास है। इस ट्रस्ट की स्थापना महात्मा गांधी ने की थी। ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी जितेंद्र देसाई को आशंका है कि गांधी साहित्य 2009 से महंगा हो जाएगा। उनके मुताबिक, कानूनन लेखक की मृत्यु के 60 साल बाद तक कॉपीराइट बना रहता है।
देसाई का कहना है, ‘हम लोग तो गांधीजी की पुस्तकें नाममात्र की कीमत पर बेचते रहे हैं, लेकिन अन्य प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित उन्हीं पुस्तकों की कीमत ज्यादा हो सकती है।’