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सलवा जुड़ूम शिविर अब बनेंगे गांव

रायपुर. नक्सलियों के खिलाफ जनजागरण अभियान ‘सलवा जुड़ूम’ के विस्थापितों के लिए चलाए जा रहे राहत शिविरों को ही गांवों के रूप में विकसित किया जाएगा। 12 वें वित्त आयोग से इस मद में कोई राशि नहीं ली जा सकी, लेकिन 13 वें वित्त आयोग से इसके लिए अलग से राशि की मांग की जाएगी। इस समय दंतेवाड़ा और बीजापुर के 17 राहत शिविरों में करीब 48 हजार लोगों को ठहराया गया है।

नक्सलियों ने दंतेवाड़ा के 640 गांवों को उजाड़ दिया है। इन लोगों को सरकार ने अस्थायी राहत कैंपों में रखा। इन शिविरों में पानी, बिजली, स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने की व्यवस्था कर दी गई है। राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष डीएन तिवारी ने बताया कि शिविरों में इस समय करीब 100 करोड़ रुपए सालाना खर्च हो रहे हैं। प्लान और नान प्लान की राशि शिविरों में लगाई जा रही है। वास्तव में यह राशि गांवों में खर्च होनी थी।

राहत शिविरों में रह रहे आदिवासियों के अब गांव लौटने की संभावना नजर नहीं आ रही है। यही वजह है कि शासन ने वहां पर आदिवासियों के स्थायी मकान बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इन कामों के लिए अलग से राशि की मांग की जाएगी। श्री तिवारी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल यह तय नहीं है कि कुल कितनी रकम मांगी जाएगी। आने वाले दिनों इस बारे में पूरा प्रस्ताव तैयार हो जाएगा।

मुख्यमंत्री की सहमति : सलवा जुड़ूम राहत शिविरों को गांवों में तब्दील करने के संबंध में मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने भी सैद्घांतिक सहमति दे दी है। सुरक्षा कारणों के अलावा एक स्थान पर आदिवासियों को बसाने से सरकारी मदद पहुंचने में आसानी होगी।





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