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नई दिल्ली. सरकार ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) की कार्यप्रणाली की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की है। इसे छह महीने में अपनी रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया है। इस तरह की समिति पिछली बार 1991 में गठित की गई थी।
सूत्रों ने बताया कि गृह मंत्रालय ने यह कदम ऐसे वक्त उठाया है, जब कोटा लागू करने में हो रही देरी से सरकार नाखुश है और संस्थानों की दाखिला नीति पर सवाल उठाए गए हैं।
समिति का नेतृत्व मारुति उद्योग लि. के चेयरमैन आरसी भार्गव करेंगे। यह समिति इस बात की समीक्षा करेगी कि अपने उद्देश्य को पूरा करने में सभी छह संस्थानों की वर्तमान स्थिति क्या है। साथ ही ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में उनकी विस्तारण योजना, विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रत्येक छात्र पर आने वाला खर्च, एजुकेशनल लोन की उपलब्धता, छात्रवृत्ति आदि की भी समीक्षा होगी।
गृह मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है कि पिछली समीक्षा के बाद से अब तक कई नई गतिविधियां हो चुकी हैं। इसी के मद्देनजर तीसरी समीक्षा समिति के गठन की जरूरत महसूस की गई। इससे पहले एक समीक्षा समिति 1979 में गठित की गई थी और दूसरी 1991 में।