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जयपुर. पुलिस ने बुधवार को झोटवाड़ा के हरदपुरा में नकली मावा बनाने की फैक्ट्री पर छापा मारकर पांच जनों को गिरफ्तार किया है। इस फैक्ट्री से गोपालजी का रास्ता में भागचंद-प्रकाश चंद जैन नाम की फर्म पर नकली मावा सप्लाई किया जाता था। फर्म तथा फैक्ट्री मालिक जितेन्द्र तथा भवनेंद्र जैन फरार हैं। पांच क्विंटल मावा बरामद किया गया है।
आईजी पीके सिंह ने बताया कि क्रिमिनल इंटेलीजेंस यूनिट की टीम को खोरा बीसल के पास हरदपुरा गांव में नकली मावा बनाने की सूचना मिली। इसके बाद झोटवाड़ा पुलिस के सहयोग से छापा मारा गया। मौके से दो क्विंटल नकली मावा, पांच पीपे सोयाबीन का तेल, तीन पीपे डालडा वनस्पति, घटिया क्वालिटी के दूध पाउडर के 11 कट्टे, 40 किलो चीनी व अन्य सामान बरामद किया गया। यह गोरखधंधा करीब डेढ़ महीने से चल रहा था।
पुलिस ने नकली मावा बना रहे कठूमर अलवर निवासी जोगेन्द्र (21) भोलाराम (20) राजू (19) गुड्डाराम (20) व भगवान राम को गिरफ्तार कर लिया। बाद में रसद विभाग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने नमूने लिए। फैक्ट्री से बरामद नकली मावे की मात्रा दो क्विंटल है।
रोजाना 50 हजार का फायदा: फैक्ट्री में रोजाना करीब चार क्विंटल नकली मावा तैयार होता था, जिसकी लागत दस हजार रुपए आती थी। इसी नकली मावे को गोपालजी के रास्ते में 150 रु. किलो के हिसाब से बेचे जाने पर औसतन पचास हजार रुपए रोजाना की बचत होती थी।
यूं बन रहा था नकली मावा: दूध पाउडर को पानी में घोलने के बाद उसमें डालडा व सोयाबीन का रिफाइंड तेल मिलाकर गर्म किया जाता था। बाद में चीनी तथा अन्य सुंगधित चीजें मिला दी जाती थीं।
आसपास के इलाकों में होती थी सप्लाई: गोपालजी के रास्ते में भागचंद-प्रकाश चंद जैन के नाम की फर्म नकली मावा बेचने का प्रमुख स्थान था। फैक्ट्री पर छापे के बाद लालसोट निवासी भगवान सहाय गुप्ता को तीन क्विंटल नकली मावा लालसोट ले जाते हुए गिरफ्तार कर लिया गया। गुप्ता की फर्म से जयपुर सहित आसपास के इलाके के मिष्ठान भंडारों में रोजाना काफी मात्रा में मावा सप्लाई किया जाता था।
गांव में किसी को भनक तक नहीं: छापे का पता चलने के बाद गांव वाले उस मकान के आसपास जमा हो गए, जहां नकली मावा बनता था। लोगों ने बताया कि इस मकान का दरवाजा केवल गाड़ी आने के दौरान ही खुला रहता था। मकान के चारों इतनी ऊंची दीवार बनाई गई है ताकि किसी को बाहर से कुछ दिखाई न दे।
लागत 30 रु. बिक्री 150 में
नकली मावे की लागत 25 से 30 रु./किलो आती थी, जबकि बेचा जाता था 150 रु. किलो। वह भी शुद्धता के लिए मशहूर गोपालजी के रास्ते में।