मुंबई/ न्यूयार्क .क्रूड आयल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में 98 डॉलर के पार चली गई हैं। सौ डॉलर के आसपास भारतीय सब्सिडी का तंत्र भी जवाब देने लगा है। गुजरात और हिमाचल प्रदेश के आसन्न चुनाव के बावजूद सरकार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मामूली इजाफा करना पड़ सकता है। फिलहाल तो सरकार ने एक सप्ताह के लिए फैसला टाल दिया है। सरकारी पक्ष बता रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी दीपावली के मौके पर कोई कठोर फैसला लेने के पक्ष में नहीं थीं।
क्या होगा असर निर्यात पर खतरे
रुपए की मजबूती, तेल में तेजी और खाद्य पदार्थो की कीमतों में वृद्धि रिजर्व बैंक की कड़ी परीक्षा लेगी। मौद्रिक नीति को ज्यादा सख्त बनाया तो विकास प्रभावित होगा। मुद्रास्फीति तेजी से बढ़ी तो रिजर्व बैंक को सख्त कदम उठाने होंगे। कर्ज की लागत बढ़ाई गई तो लोगों की आमदनी पर असर पड़ेगा। तेल में हर दस डॉलर की वृद्धि से एशिया के ट्रेड सरप्लस में 30 डॉलर कमी आएगी।
खाद्य पदार्थ होंगे महंगे:
क्रूड आयल की तेजी ने मलेशिया में पाम आयल को महंगा बना दिया है। इसका असर सोया आयल पर पड़ता है। रुपया साल में 13 फीसदी मजबूत हुआ है और इसने खाद्य पदार्थो व क्रूड आयल की कीमतों के असर को कमजोर किया है। लेकिन रिजर्व बैंक क्या अब भी रुपए को मजबूत होने दे सकता है?
90 फीसदी तेल आयात: इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने एक रिपोर्ट में कहा है किभारत 2030 में जरूरत का 90 फीसदी पेट्रोलियम आयात कर रहा होगा। उस समय भारत जापान को पार करके दुनिया का तीसरा बड़ा तेल आयातक बन जाएगा। भारत का तेल आयात रोजाना 60 लाख बैरल तक पहुंच सकता है। भारत और चीन का तेल आयात इतना बढ़ जाएगा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था मुश्किल में पड़ जाएगी। चीन में कार के मालिकों की संख्या सात गुनी हो जाएगी।
रिजर्व बैंक की दिवाली खरीदडीएनए दिवाली के पहले तरलता घटाने के लिए रिजर्व बैंक ने डॉलर की खरीद बढ़ा दी है। सीआरआर में इजाफे के कारण रिजर्व बैंक की क्षमता बढ़ गई है। रिजर्व बैंक आगे भी हस्तक्षेप जारी रखेगा।