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बेंगलूर. चार हाथ और चार पैर वाली मासूम ‘लक्ष्मी’ ने आपरेशन के बाद दिवाली के एक दिन पहले गरुवार को जैसे ही आंखे खोली तो उसके माता-पिता और
डाक्टरों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा।
अतिरिक्त अंगों को निकालने के लिए किए गए 27 घंटे के जटिल ऑपरेशन के बाद दो वर्षीय लक्ष्मी ने पहली बार थोड़ी देर के लिए न केवल हाथ और पांव के अंगूठों को हिलाया, बल्कि आंखें भी खोलीं। डॉक्टर अभी तक के नतीजों से पूरी तरह संतुष्ट हैं। ऑपरेशन में डॉक्टरों की टीम का नेतृत्व करने वाले डा. शरण पाटील ने बताया कि अभी तक कोई जटिलता सामने नहीं आई है। सब कुछ सही दिशा में चल रहा है।
लक्ष्मी को पृथक आईसीयू में रखा जा रहा है। डॉक्टरों की टीम उसकी सेहत पर 24 घंटे नजर रख रही है। लक्ष्मी वेंटीलेटर पर है। उसकी स्थिति का आकलन करने के लिए नियमित अंतराल पर अनेक टेस्ट किए जा रहे हैं। उसके अहम शारीरिक अवयव सही ढंग से काम कर रहे हैं, फिर भी अगले 48 घंटे काफी महत्वपूर्ण हैं।
कौन है लक्ष्मी : बिहार में अरारिया जिले के रामपुर गांव में एक गरीब परिवार में लक्ष्मी का जन्म हुआ था। उसके जन्मजात चार हाथ व चार पैर थे, जिसे देखकर पूरा गांव हैरान रह गया और उसे लक्ष्मी देवी का अवतार मानने लगा। गांव के लोगों ने लक्ष्मी के लिए गांव में मंदिर बनवाने की भी तैयारी कर ली थी।