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अहमदाबाद. बात चाहे पढ़ाई की हो, या नौकरी के दौरान परफॉर्मेंस की, दूसरों से आगे निकलने का दबाव अब युवाओं से लेकर कापरेरेट कंपनियों के आला
अधिकारियों तक को ‘स्मार्ट ड्रग’ के चंगुल में फंसाता जा रहा है। आईआईएम अहमदाबाद के छात्र जहां इन दवाओं का सेवन 16-18 घंटे की पढ़ाई के लिए कर रहे हैं, वहीं बिजनेस कंपनियों के उच्च अधिकारी इसे काम के दबाव से निजात पाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
क्या है स्मार्ट ड्रग
‘स्मार्ट ड्रग’ असल में ऐसी दवाएं हैं, जिनका सेवन करने पर लंबे समय तक सजगता बनी रहती है। इसकी वजह है, दवा में शामिल मोडाफिनिल नाम का तत्व, जो दिमाग को सक्रिय रखता है। भारत में ‘स्मार्ट ड्रग’ बाजार में उपलब्ध हैं। इसे खाने पर तनाव या थकान के बावजूद नींद नहीं आती और दिमाग भी काम करता रहता है।
खुलेआम बिक रही हैं
हालांकि इस ‘स्मार्ट ड्रग’ को किसी जानकार मनोचिकित्सक की सलाह पर ही बेचा जाना चाहिए, लेकिन दवाओं की दुकान पर इसे बगैर डॉक्टरी पर्ची के आसानी से खरीदा जा सकता है।
खतरनाक हो सकती हैं
मनोचिकित्सक प्रशांत भिमानी का कहना है कि कई मामलों में इसका सेवन खतरनाक साबित हो सकता है। डॉ. विश्वनाथ ठाकुर के मुताबिक, यह दवा दिमागी सतर्कता और सजगता तो बढ़ा देती है, लेकिन अंतत: इसका कुप्रभाव सिरदर्द और चिड़चिड़ेपन के रूप में सामने आता है।
डॉक्टर रत्ना बिलवानी के मुताबिक, ‘मोडाफिनिल किसी भी स्वस्थ व्यक्ति का न्यूरो-केमिकल संतुलन बिगाड़ सकता है। कोई मनोचिकित्सक इसे पढ़ाई या कामकाजी तरक्की के लिए इस्तेमाल करने की सलाह नहीं देगा’।
छात्रों की दलील
आईआईएम, अहमदाबाद के छात्र विरल दीक्षित के अनुसार, इस दवा का सेवन उनका मनोबल बढ़ा देता है। वह इसका सेवन तीन दिन में एक बार ही करते हैं, क्योंकि इसके लगातार सेवन से ब्लड प्रेशर असामान्य हो जाता है।