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पेट्रोलियम सब्सिडी से चिंतित हैं मनमोहन

नई दिल्ली. सरकार खाद्यान्न, पेट्रोलियम और उर्वरक की सब्सिडी को तर्कसम्मत बनाकर दबाव कम करना चाहती है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि करीब एक लाख करोड़ की इन सब्सिडी के कारण सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और छात्रवृत्ति पर ज्यादा खर्च नहीं कर पा रही है। योजना आयोग की पूर्ण बैठक के बाद प्रधानमंत्री ने जरूरतमंद लोगों तक सब्सिडी के लाभ पहुंचाने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा
1. सब्सिडी के मद में इतनी अधिक धनराशि खर्च करने का मतलब कम स्कूल, कम अस्पताल, कम छात्रवृत्ति और कृषि तथा बुनियादी ढांचा क्षेत्र में कम सार्वजनिक निवेश है।
2. सब्सिडी की पुनर्रचना महत्वपूर्ण है ताकि जरूरतमंद और गरीब लोगों को उनसे फायदा पहुंचे और सभी खामियां दूर हों।
3. सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि सशक्तीकरण कार्यक्रमों का कार्यान्वयन प्रभावशाली ढंग से हो और उनमें कोई खामी न रहे। खाद्यान्न उत्पादन और कीमतों के अंतरराष्ट्रीय रुझान मांग और कीमतों पर दबाव बनाने जा रहे हैं।
4. देश को इन दबावों को दूर करने की जरूरत है। कृषि क्षेत्र हमारी अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन करे और हमारी खाद्यान्न संबंधी योजना वास्तविकताओं के अनुरूप हो।
5. सरकार के लिए कृषि मुख्य मुद्दा है। कृषि विकास दर चालू वर्ष में 4 फीसदी रहने की उम्मीद है। 11 वी योजना के लक्ष्य:
1. सालाना प्रति व्यक्ति आय में 7.6 प्रतिशत वृद्घि और आर्थिक विकास औसतन नौ फीसदी रहने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है। योजनावधि के पहले वर्ष (2007) में आठ प्रतिशत और योजना के अंतिम वर्ष (2012) तक दस प्रतिशत की विकास दर हासिल की जानी है।
2. कृषि क्षेत्र के चार प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है जबकि उद्योग और सेवा क्षेत्र की विकास दर नौ प्रतिशत और 11 प्रतिशत रहेगी।
3. जीडीपी के अनुपात में निवेश बढ़कर 36.7 प्रतिशत होने का अनुमान है जबकि बीती योजना के दौरान निवेश जीडीपी का 30.8 फीसदी था।
4. बचत दर जीडीपी की 34.8 प्रतिशत रहेगी। जो 10वीं योजना के दौरान 30.8 प्रतिशत थी।





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