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Manoranjan
Cinema
Bollywood Bollywood एशा को स्टंट्स बहुत पसंद हैं, इतने कि उन्हें चोट लगने का भी डर नहीं। और तो और उन्हें इस बात की भी कोई टैंशन नहीं कि अगर उनकी ख़ूबसूरत स्किन पर दाग़ पड़ गए तो?..
‘डार्लिग’ करके कैसा लग रहा है?
अच्छा ही लग रहा है। इस फिल्म से मैं बहुत उत्साहित थी, क्योंकि मैं बरसों से रामूजी के साथ काम करना चाहती थी और जब मौक़ा मिला, तो मैंने उस झपट लिया। इसमें मेरा किरदार एक भूत का था। इसमें भी काफ़ी अजीब-सा लगा क्योंकि दिन-भर भूत का रोल करने के बाद जब रात को मैं अकेले घर जाती थी, तो डर भी लगता था। कई बार दिन में फिल्माया गया कोई सीन याद आ जाता था, तो रूह कांप जाती थी।
फिर किसी को साथ ले नहीं जाती थी, घर तक छोड़ने के लिए?
इतना भी नहीं डरती मैं।
फ़रदीन के साथ काफ़ी फिल्में कर लीं आपने। आपके कैरियर की बीस फिल्में हैं और पांच उनके साथ। कोई कैमिस्ट्री है क्या?
कैमिस्ट्री तो है। बचपन का दोस्त है वो मेरा। उसके साथ अच्छा व़क्त बिताया है मैंने। और हम हमेशा लड़ते ही रहते हैं। जब भी हम सैट पर साथ होते हैं, बाक़ी सारे लोग हमसे घबराते हैं, क्योंकि अगर हम मिल गए, तो बाक़ी किसी की ख़ैर नहीं। सबकी टांग खींच देते हैं हम दोनों। और अगर हम दोनों साथ नहीं हुए, तो एक-दूसरे की ही खींचने लगते हैं। ख़ैर, उसमें भी लोगों को काफ़ी मज़ा आता है। दो एक्टर्स के बीच ऐसी ही कैमिस्ट्री होती है, जिससे फिल्म में भी मज़ा आ जाता है। ‘डार्लिग’ फ्लॉप हो गई। उससे पहले ‘कैश’ भी। और उससे भी पहले ‘जस्ट मैरिड’, ‘अनकही’ और ‘प्यारे मोहन’।
सिलसिला क्या है?कुछ नहीं कह सकते। ‘डार्लिग’ तो बहुत अच्छी फिल्म थी, हालांकि ‘कैश’ से बाद में मुझे ही नहीं, कई लोगों को असंतोष हुआ था। एक तो पहली बार मुझे अकेले एक्शन रोल से फिल्म संभालनी थी। जब फिल्म की कहानी मुझे सुनाई गई थी, तो बहुत अच्छी लगी थी। शूटिंग भी बहुत बढ़िया हुई। पर जब फिल्म एडीटिंग टेबल पर पहुंची, वहीं कुछ गड़बड़ हो गई।
‘कैश’ में आपके एक्शन सीन की बड़ी हाइप बनाई गई थी?
हां, वह तो था। मुझे एक्शन रोल पसंद भी हैं। मुझे अगर आप टिपिकल लड़कियों की तरह कपड़े पहनाकर पेड़ के आजू-बाजू नाचने के लिए कहेंगे, तो मुझसे नहीं होने वाला। मुझे एक्शन पसंद है। मारा-मारी के लिए बोलो, मैं तुरंत करने लग जाऊंगी। बचपन से ही टॉमबॉय रही हूं न।
अपने स्टंट्स भी ख़ुद ही करती हैं? कभी चोट लग गई, तो आपका ख़ूबसूरत शरीर ख़राब हो जाएगा।ऐसी बात नहीं है। मुझे पता है कि स्टंट करूंगी, तो चोट भी लगेगी। और जब मुझे स्टंट पसंद है, तो भला चोट से क्यों डरूंगी? शरीर पर चोट के निशानों से भी डर नहीं। मेरे चेहरे पर पहले ही चोट का एक निशान है और मुझे लगता है कि यह दाग़ बहुत सैक्सी लगता है। सो, अगर और भी निशान पड़ जाते हैं, तो मुझे कोई चिंता नहीं। मैंने पहले भी बताया है कि मैं बहुत टॉमबॉय क़िस्म की हूं। मैं उस तरह की एक्ट्रेस नहीं कि सीन ख़त्म हुआ, तो तुरंत जाकर अपने मेकअप वैन मंे छिप जाऊंगी कि कहीं धूप के कारण मेरी स्किन ख़राब न हो जाए। मैं नहीं चाहती कि मेरा बॉय हमेशा मेरे पीछे छाता लेकर घूमे कि बेबी, स्किन सेव कर लो। मुझे अच्छी बॉडी मिली है, तो मैं उसका इस्तेमाल भी अपनी ही तरह से करूंगी।
‘धूम’ में आपने एक्शन किया था और अब ‘कैश’ में भी। कितना मज़ा आया?‘धूम’ में तो लोगों ने मेरा ग्लैमर देखा था, ‘कैश’ में लोगों को पता चल गया कि यह एक्टिंग भी कर सकती है। हालांकि, ऐसा रिएक्शन मुझे ‘अनकही’ के बाद सबसे •यादा मिला था। मैं उसे अपनी बैस्ट फिल्म मानती हूं। ख़ैर, ‘कैश’ के एक्शन की बात करूं, तो मुझे लग रहा था कि मैं माइकल शूमाकर बन गई हूं और उसी की तरह फर्राटे से कार चला रही हूं। मुझे स्पीड बहुत अच्छी लगती है, पर मुंबई में इतना ट्रैफिक होता है कि मैं उस तरह से ड्राइव कर ही नहीं पाती। पर हमने ‘कैश’ की शूटिंग केपटाउन में की थी। वहां पहले मैंने फर्राटे से कार चलाने की ट्रेनिंग ली थी और उसके बाद वहां की सड़कों पर जो कार चलाई कि मज़ा आ गया। उस समय इतनी ख़ुशी हो रही थी कि यह काम सिर्फ़ लड़के ही नहीं, मैं भी कर सकती हूं। मुझे केपटाउन इतना अच्छा लगा कि मैं सबसे यही कहती फिर रही हूं, कि एक दिन मैं वहीं पर घर बनाकर बस जाऊंगी।
घर बसाने के बारे में क्या ़ख्याल है?आपका मतलब लाइफ़ पार्टनर से है? देखिए, मैं लगातार काम करती हूं। सुबह उठो, फटाफट तैयार हो जाओ, देखो, आज क्या-क्या करना है, शूटिंग पर भागो, उसके बाद भी कोई काम बच रहा है, तो दौड़कर उसको करो। इसलिए फ़िलहाल घर बसाने की तो बात भूल ही जाइए अभी।