नई दिल्ली.पर्दे के पीछे चल रही जांच से कबूतरबाजी के लिए अधिकारी और राजनयिक पासपोर्टे के इस्तेमाल के संगठित गोरखधंधे का राजधानी में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। संदेह है कि इसमें सेना और विदेश मंत्रालय के कईअफसर शामिल हो सकते हैं। इस संबंध में कुछ दिन पहले जर्मनी में एक भारतीय सैनिक को गिरफ्तार भी किया गया था। भारत लाकर उससे पूछताछ जारी है।
गोरखधंघे का खुलासा बीते शुक्रवार को तब हुआ, जब इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर इमीग्रेशन अधिकारियों ने व्हाइट पासपोर्ट से जर्मनी जा रहे चार लोगों को पकड़ा। पूछताछ में इन लोगों ने बताया कि उन्होंने ये पासपोर्ट एक सैनिक से हासिल किए हैं। चारों पासपोर्ट सैनिकों के नाम जारी हुए थे। इसके बाद इमीग्रेशन विभाग ने सेना मुख्यालय को सूचित किया।
इन चारों से पूछताछ में एक दलाल का भी पता चला है।50 हजार में बिका हर पासपोर्ट: इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर पकड़े गए चार लोगों ने 50-50 हजार में सुरेश बाबू से व्हाइट पासपोर्ट खरीदे थे। सुरेश सेना मुख्यालय के बैंड में काम करता है।
मामला क्या है:
सरकारी ड्यूटी पर विदेश जाने वाले अधिकारी को तय अवधि के लिए व्हाइट पासपोर्ट दिया जाता है, राजनयिकों को मरून रंग के पासपोर्ट दिए जाते हैं। इन पासपोर्टाें से कई देशों में बगैर वीजा प्रवेश मिल जाता है। इमीग्रेशन ऑफिसर भी ऐसे पासपोर्ट धारकों की ज्यादा जांच नहीं करते। कबूतरबाजी के लिए दलाल ऐसे पासपोर्ट पाने की फिराक में रहते हैं।
सेना और खुफिया एजेंसियां जांच में जुटीरैकेट इतना बड़ा है कि सेना, आव्रजन विभाग, कस्टम विभाग, खुफिया एजेंसियां और कुछ अन्य विभाग स्वतंत्र रूप से इसकी जांच कर रहे हैं। सेना की जांच से पता चला है कि रैकेट में न केवल सैनिक, बल्कि उच्च अधिकारी भी शामिल हैं। इस मामले पर सेना अभी पर्दा डाले हुए है। खुफिया एजेंसियों को शक है कि विदेश मंत्रालय में कुछ पासपोर्ट अफसर भी इसमें लिप्त हो सकते हैं। अधिकारी पासपोर्ट बेचने के आरोप में जर्मनी में पकड़े गए सुरेश बाबू नामक सैनिक को वापस लाकर दिल्ली छावनी में पूछताछ की जा रही है।