बठिंडा. सरहिंद नहर में वीरवार को आई दरार के बारे मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को भेजी रिपोर्ट में पूरी जिम्मेदारी चूहों पर डालकर अधिकारियों ने सभी विभागों को बचाने की कोशिश की है। दरार से 300 घरों में पानी घुस गया था।
मालूम हो कि वीरवार सुबह साढ़े चार बजे बहिमण दीवाना पुल के पास आई 25-30 फुट दरार को रात 9:30 बजे तक 80 फीसदी भर दिया गया था, लेकिन रात 11:20 पर दरार में रखी जा रही मिट्टी की बोरियों से बनाया बांध एक बार फिर से टूट गया। इसके बाद सेना के जवान मिट्टी से भरे 11 ट्रक लेकर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने इस मामले में तीन दिन में जांच पूर्ण करने के आदेश दिए थे।
क्रैडिट के चक्कर में हुई ढिलाई दरार को भरने का काम क्रैडिट लेने के चक्कर में ढीला पड़ता गया। तीस फुट की दरार को भरने में पूरे चौबीस घंटे लगे। शुक्रवार को सुबह पांच बजे ओके रिपोर्ट दी गई। सेना के अधिकारियों ने बताया कि जिला प्रशासन क्रैडिट लेने के चक्कर में उन्हें काम करने में ज्यादा सहयोग नहीं दे रहा था लेकिन जब वीरवार की रात 11.20 बजे बनाया जा रहा बांध टूट गया तो अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए और सेना को पूरे आप्रेशन की कमान सौंप दी गई।
चूहों ने किनारे खोखले किए सिंचाई विभाग के एक्सईएन केसी गोयल (अब स्थानांतरित) ने लुधियाना जोन के एससी एएस दुल्लत को भेजी रिपोर्ट में लिखा है कि नहर के किनारे, चूहों द्वारा बिल बनाने के कारण खोखले हो गए हैं।
एक कारण पेड़ काटना भी केसी गोयल के स्थान पर आए एक्सईएन हरबंस सिंह चहल का मानना है कि वन विभाग की ओर से पेड़ काटने के कारण भी नहर के किनारे खोखले होते हैं। दरार का कारण पेड़ काटना भी हो सकता है।
क्या कहते हैं वन अधिकारी जिला वन अधिकारी डा. एसपी आनंद का कहना है कि नहर में आई दरार का कारण पेड़ों की कटाई नहीं है। उन्होंने वन कापरेरेशन के जीएम संजय बंसल से रिपोर्ट मांगी थी। रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा है कि जहां से दरार आई है वहां पेड़ों की कटाई नहीं की गई है।