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अब विस्फोटों के लिए सुपारी

जालंधर. पंजाब में फिर से सक्रिय होने के प्रयास में लगे आतंकवादी सगंठनों बब्बर खालसा इंटरनैशनल, खालिस्तान कमांडो फोर्स, इंटरनैशनल सिख यूथ फैडरेशन, खालिस्तान जिदांबाद फोर्स ने अपने काम करने का तरीका बदल लिया है। अब इन संगठनों ने सुपारी देकर बम विस्फोट करने की रणनीति बनाई है।

खुफिया एजैंसियों को मिली जानकारी के मुताबिक, जहां एक ओर पाक से संचालित इन आतंकी सगंठनों ने खुद को हाईटैक करना शुरू कर दिया है, वहीं ये संगठन पंजाब में सक्रिय पुराने आतंकियों को पैसों का लालच देकर विस्फोट कराने की योजना बना रहे हैं। लुधियाना बमकांड की जांच के दौरान भी यह बात सामने आई है कि विदेशों में सक्रिय आतंकी यहां के युवकों को विदेश में सैटल होने का लालच दे रहे हैं।

वहीं, सुपारी देकर विस्फोट करने के नए तरीके पर भी ये काम कर रहे हैं।खुफिया एजैंसियों की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा भी किया है कि पंजाब के चारों बड़े आतंकी सगंठनों ने अब खुद को हाईटैक करना शुरू कर दिया है। अभी तक इंटरनैशनल स्तर के आतंकी संगठन ही कम्प्यूटर और इंटरनैट का इस्तेमाल कर रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, लुधियाना बम विस्फोट मामले में संदेह के घेरे में आए गुरप्रीत सिंह ने पाकिस्तान में कम्प्यूटर ट्रेनिंग ली थी। हथियारों का इस्तेमाल कर मौत बांटने वाले ये सगंठन अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए अब कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग का इस्तेमाल करने लगे हैं।

खबर है कि बब्बर खालसा के चीफ वधावा सिंह बब्बर ने अपने बेटे जतिंदर सिंह को लाहौर के एक कालेज से कम्प्यूटर ग्राफिक्स का दो साल का डिप्लोमा करवाया है। खालिस्तान कमांडो फोर्स के चीफ परमजीत सिंह पजंवड़ ने अपने सबसे नजदीकी साथी एवं बेगोवाल के रहने वाले आतंकवादी रणजीत सिंह राजस्थानी को कम्प्यूटर कोर्स करवाया है। आरडीएक्स से बम बनाने में माहिर खालिस्तान जिदांबाद फोर्स के चीफ रणजीत सिंह नीटा को भी आईएसआई ने कम्प्यूटर चलाना सिखा दिया है। विदेश में खालिस्तान के लिए फंड जमा का काम करने वाले एवं जर्मनी में सक्रिय इंटरनैशनल सिख यूथ फैडरेशन के चीफ लखबीर सिंह रोडे भी अब कम्प्यूटर के जरिये अपनी गतिविधियां चला रहा है।

अब कम्प्यूटर बनेगा आतंकवादियों का हथियार पंजाब में आतंकवाद थ्री-नॉट-थ्री से शुरू हुआ था आतंकवादियों ने सबसे पहले पुलिसकर्मियों से ये बंदूकें छीनकर इसकी शुरुआत की थी, बाद में आईएसआई ने इनको एके-४७, एके-५६, एके-74, राकेट लांचर, एमई-36 हैंड ग्रेनेड, पैन बम, पार्सल बम, आरडीएक्स दिया। कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग का इस्तेमाल अब जाली करंसी तैयार करने, संवेदनशील स्थानों की जानकारी आईएसआई तक पहुंचाने, साथियों से संर्पक करने और भारतीय सुरक्षा एजैंसियों की साइट हैक करने के लिए किया जा रहा है। आतंकवादी गुरप्रीत सिंह से बरामद हुए कम्प्यूटर में भी ऐसी जानकारी मिली है। गुरप्रीत ने लाहौर में चले कैंप में कम्प्यूटर कोर्स किया था, जिसमें उसे साइट हैक करने की ट्रेनिंग दी गई। गुरप्रीत ई-मेल के जरिये ही पाकिस्तान सूचनाएं भेजा करता था, वह मोबाइल फोन कम ही इस्तेमाल करता था।

हथियारों के स्थान पर अब लैपटॉप वधावा सिंह के बेटे को पाक में मुखी के नाम से जाना जाता है। मुखी के पास लैपटॉप है और अक्सर अपने पिता के साथ पजेरो गाड़ी में डेरा करतारपुर साहिब जाता है। खुफिया एजैंसियों के पास पुख्ता जानकारी है कि उसने जाली करंसी का काम शुरू कर दिया है। इसके लिए उसने पंजाब में सक्रिय तस्करों से संपर्क साधा है। मुखी अब बब्बर खालसा के कैडर को सक्रिय करने की कोशिश में है। इसी तरह ट्रेनिंग लेने के बाद केसीएफ के रणजीत सिंह राजस्थानी ने भी अब लैपटॉप के जरिये जाली करंसी का काम शुरू किया है।





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