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देश पर कुर्बान संधू

जालंधर. Major V S Sandu मुठभेड़ में शहीद होने वाले मेजर वरिंदर सिंह संधू जालंधर के रहने वाले थे। उनका शव शनिवार को हवाई जहाज में चंडीगढ़ और फिर जालंधर लाया गया। उनके परिवार में पत्नी आशु और 3 साल का बेटा है।

52 राष्ट्रीय राइफल (आरआर) से संबधित जालंधर के मेजर वरिंदर सिंह संधू दीवाली के दिन कश्मीर में विदेशी आतंकियों से लोहा लेते शहीद हो गए। इंडियन मिलिटरी अकादमी (आईएमए) के 2001 बैच से संबधित मेजर संधू मूल रूप से आरटी रैजीमैंट के अधिकारी थे।

सैन्य अधिकारी मेजर संधू का पार्थिव शरीर शनिवार को श्रीनगर से हवाई जहाज में चंडीगढ़ और फिर सड़क मार्ग से बाद दोपहर जालंधर लाया गया। पार्थिव शरीर छावनी स्थित मिलिटरी अस्पताल (एमएच) के शवगृह में रखवाया गया है। अंतिम संस्कार रविवार सुबह किया जाएगा। इससे पूर्व सेना के वरिष्ठ अधिकारी शहीद मेजर को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। फील्ड एरिया में तैनात होने की वजह से उनकी पत्नी आशु और 3 वर्षीय बेटा आदविक सिंह जालंधर कैंट स्थित फील्ड एरिया फैमिली क्वार्टर्स में रह रहे थे।

विदेशी आतंकवादियों के खिलाफ था आपरेशनदीवाली से तीन दिन पहले 29 आरआर ने विदेशी आतंकवादियों के खिलाफ आपरेशन चलाया था। तीन रात और चार दिन चले आपरेशन में बाद में 52 आरआर को भी शामिल किया गया। मेजर वरिंदर सिंह संधू अपने दो अन्य अधिकारियों के साथ आपरेशन में शामिल हुए। दीवाली की सुबह सेना एक आतंकवादी को मार गिराने में सफल रही, जबकि दो अन्य आतंकवादी एक मकान में छिपे हुए थे।

मेजर संधू ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए उनमें से एक को दबोचने के लिए दीवार फांद ली। इसी आपरेशन में हिस्सा लेने वाले और शव कोसाथ लेकर जालंधर पहुंचे 52 आरआर के मेजर ने बताया कि मेजर संधू ने अन्य अधिकारियों को वहीं रुकने के लिए कहा। मेजर संधू एक आतंकवादी को मारने में सफल रहे, लेकिन इसी दौरान चली एक गोली मेजर संधू के सिर में लगी और वह वीरगति को प्राप्त हुए, जिसे मेजर संधू ने मारा वह अत्यंत खतरनाक आतंकवादी बताया गया है।

चीफ कमैंडेशन कार्ड से सम्मानित थेमेजर वरिंदर सिंह संधू निडर और जांबाज अधिकारी थे। इस आपरेशन से पूर्व भी वह कई आपरेशनों में हिस्सा ले चुके थे। उन्हें चीफ कमैंडेशन कार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका था।

देवलाली में करना था ज्वायन मेजर संधू का कश्मीर में ही शहीद हो जाना नियति था। मेजर संधू आरआर में अपना ‘लगभग अढ़ाई वर्ष’ का कार्यकाल पूरा कर चुके थे और कश्मीर के बाद उन्हें देवलाली में ज्वायन करना था।

पापा आफिस गए हैं, दो बजे आएंगेमेजर संधू कातीन वर्षीय बेटा आदविक सिंह कुदरत के उस क्रूर फैसले से बिल्कुल अंजान है कि उसके पापा अब इस दुनिया में नहीं हैं। घर के लॉन में खेल रहा आदविक लोगों के आने और घर में मचे कोहराम से बीच-बीच में परेशान हो उठता, लेकिन यही कहता कि ‘पापा आफिस गए हैं और दो बजे आएंगे’।





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