श्रीनगर. किशनगंगा पावर प्रोजेक्ट में 1500 करोड़ रुपए के गबन मामले में एक स्थानीय कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। इस घोटाले के बाद 350 मेगावाट क्षमता की परियोजना रद्द कर दी गई थी। गबन के आरोपियों में 8 पूर्व चीफ इंजीनियर, कार्यकारी इंजीनियर व 135 ठेकेदार शामिल हैं।
जिला व सेशन जज सैयद तारिक अहमद नक्शबंदी ने अपने फैसले में कहा कि जांच के दौरान जब्त हुए रिकार्ड के अलावा विशेषज्ञों की रिपोर्ट व गवाहों के बयानों से इंजीनियरों व ठेकेदारों की संलिप्तता साफ उजागर होती है। जज ने कहा, आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया सबूत उन्हें गुनहगार साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।
क्या है घोटाला: जम्मू व कश्मीर सरकार ने 1992 में राज्य के ऊर्जा संकट से निपटने के लिए नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पॉवर कारपोरेशन से किशनगंगा हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट की सर्वेक्षण रपट तैयार करवाई थी। बाद में यह परियोजना किशनगंगा परियोजना पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन को सौंप दी गई। इसमें गुरेज में एक बांध व क्रालपुरा बांदीपुरा में पावर प्रोजेक्ट का काम था। इसी क्रम में पीडीसी ने भिन्न ठेकेदारों को 1500 करोड़ रुपए भिन्न कामों के लिए आवंटित किए थे। यह राशि ठेकेदारों व इंजीनियरों की मिलीभगत में कथित तौर पर हड़प ली गई।