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मालिक के चेक से ड्राइवर रुपए निकालता रहा

रायपुर. वीआईपी स्टेट निवासी लेबर कांट्रेक्टर लालबाबू अंसारी का ड्राइवर इतनी चालाकी से ठगी करता रहा कि छह महीने तक उन्हें इस बात की भनक तक नहीं लगी। तीन-चार महीने के अंतराल में उसने मालिक के साइन किए चार कोरे चेक के जरिए पांच-पांच हजार रुपए निकल लिए। पकड़े जाने से पहले उसने एक मुश्त 30 हजार रुपए निकाले थे।

धोखाधड़ी का पता दिवाली के एक दिन पहले चला, जब एक ही एकाउंट से आरोपी पवन कुमार और उसके मालिक का बेटा रुपए निकालने बैंक पहुंचे। आरोपी 30 हजार रुपए निकालकर पहले ही जा चुका था। उसके बाद कांट्रेक्टर का बेटा पहुंचा। काउंटर पर बैठे बैंक अधिकारी ने यह कहकर उसे लौटा दिया कि अभी-अभी कोई रकम निकालकर जा चुका है। आनन-फानन में युवक ने अपने पिता को बुला लिया।

छानबीन करने पर पता चला कि उसके ड्राइवर ने ही धोखाधड़ी की है। ठेकेदार की शिकायत पर पंडरी थाने में आरोपी के खिलाफ चारसौबीसी कायम करने के बाद पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए जाल बिछाया। मोबाइल करके उसे देवेंद्रनगर में एक जगह पर बुलाकर दबोचा गया। आरोपी मूलत: पंजाब का रहने वाला बताया गया है। वह यहां चार-पांच सालों से रह रहा था। फिलहाल वह सड्ढू में किराए का कमरा लेकर रहता था।

पुलिस के अनुसार आठ महीने पहले कांट्रेक्टर ने युवक को काम पर रखा था। कुछ ही दिनों में ड्राइवर ने अपने मालिक का विश्वास जीत लिया। वह घर के सदस्य की तरह एसबीआई की कचहरी शाखा से लेनदेन भी करने लगा। घर के अलावा मालिक की चेक बुक कार में भी पड़ी रहती थी। वह मनचाहे ढंग से इसका इस्तेमाल करने लगा।

पूछताछ से पता चला है, आरोपी के तीन-तीन बैंकों में एकाउंट हैं। जिस दिन उसने अपने मालिक के एकाउंट से पैसे निकाले उसी तरीख में लालगंगा कांप्लेक्स स्थित फेडरल बैंक और कर्नाटक बैंक की फाफाडीह में रकम जमा की गई है। पुलिस अफसरों ने बताया कि पंडरी स्थित यूटीआई बैंक का उसका एकाउंट बंद हो चुका है।

सप्ताहभर बाद भी जुर्म दर्ज नहीं
विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी की शिकायत के एक सप्ताह बाद भी चारसौबीसी का जुर्म दर्ज नहीं किया गया। धोखाधड़ी करने वाले 30 अक्टूबर से पहले पंडरी स्थित कंपनी को ताला लगाकर भाग गए थे। कृष्णा कंसलटेंसी नाम की फर्जी कंपनी कटक की बताई गई है।





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