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प्रदेश में खुलेंगे पांच नए मेडिकल कॉलेज

भोपाल. राज्य सरकार ने अब प्रदेश में पांच नए मेडिकल कॉलेजों को प्रायवेट पार्टनरशिप में खोलने की तैयारी की है। इसके लिए भारत सरकार को प्रपोजल भेजा जा चुका है। सूत्रों के मुताबिक यह पूरी मशक्कत भारत सरकार की पहल पर की गई है। भारत सरकार ने मध्यप्रदेश सरकार से ऐसे अस्पतालों की सूची मांगी थी, जिन्हें प्रायवेट पार्टनरशिप के जरिए मेडिकल कॉलेजों के रूप में अपग्रेड किया जा सकता है।

इसमें भारत सरकार ने मध्यप्रदेश में पांच नए मेडिकल कॉलेज खोलने की मंशा जाहिर की है। इसके तहत राज्य सरकार ने पांचों सरकारी मेडिकल कॉलेजों और जिलों से ऐसे सरकारी अस्पतालों की जानकारी बुलाई थी, जिन्हें मेडिकल कॉलेज के रूप में अपग्रेड किया जा सकता है। इसके तहत प्रदेशभर से आठ से अधिक जिला अस्पतालों के प्रस्ताव आए। इन्हें राज्य सरकार ने अपनी अनुशंसा के साथ भारत सरकार को भेज दिया है।

>> भारत सरकार की ओर से हमसे प्रपोजल मांगा गया था, वह हमने भेज दिया है। यह भविष्य की योजनाएं हैं। इसमें पार्टनरशिप के आधार पर कॉलेज अपग्रेड हो सकते हैं, लेकिन अभी कुछ फायनल नहीं है।
- एमएम उपाध्याय, प्रमुख सचिव, मप्र चिकित्सा शिक्षा

>> जिन अस्पतालों के पास 300 से अधिक बेड की सुविधा है, उनका प्रस्ताव हमने राज्य सरकार को भेज दिया है।
- वीके सैनी, डायरेक्टर, चिकित्सा शिक्षा

क्यों मंगाया प्रपोजल
भारत सरकार ने उन प्रदेशों से नए मेडिकल कॉलेज के लिए प्रपोजल मंगाए हैं, जहां बहुत कम मेडिकल कालेज हैं। इसमें अरूणाचल, मेघालय, असम, उत्तरांचल, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित कई प्रदेश शामिल हैं।

इन स्थानों पर नए कॉलेज संभावित :
उज्जैन, रतलाम, देवास, शिवपुरी, गुना, भोपाल आदि। इन जिलों में अस्पतालों को अपग्रेड कर कॉलेज बनाया जाएगा।

क्या है प्रस्तावों का आधार :
मेडिकल कॉलेज के लिए कम से कम 300 बिस्तर वाला अस्पताल और 25 एकड़ जमीन चाहिए। इन मापदंडों पर खरा उतरने वाले प्रदेश के करीब आठ जिला अस्पतालों को अपग्रेडेशन की प्रक्रिया में शामिल किया गया।

निपार्टनरशिप होनाजी तय :
राज्य सरकार के पास नए मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए बजट व स्टाफ नहीं है। भारत सरकार की ओर से भी पब्लिक-प्रायवेट पार्टनरशिप योजना के तहत प्रस्ताव मंगाए गए थे। इसमें प्रायवेट पार्टनरशिप तय मानी जा रही है।

कैसी होगी पार्टनरशिप :
पब्लिक-प्रायवेट पार्टनरशिप के तहत राज्य सरकार मेडिकल कॉलेज का इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराएगी। इसमें बिल्डिंग, भवन और आधा स्टॉफ शामिल है। वहीं निजी सांझेदार मेडिकल इक्यूपमेंट, स्टॉफ और अन्य मापदंडों की पूर्ति करेंगे।

पार्टनरशिप का प्रयोग क्यों :
प्रदेश के पांचों सरकारी मेडिकल कॉलेजों की दुर्दशा को देखते हुए पार्टनरशिप का प्रयोग करने पर विचार किया जा रहा है। वर्तमान में पांचों सरकारी मेडिकल कॉलेजों पर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से मान्यता समाप्ति का खतरा छाया रहता है।

ये है मेडिकल कॉलेज के मुख्य मान्यता मापदंड-
300 बेड का अस्पताल होना जरूरी।
25 एकड़ भूमि होना अनिवार्य।
खुद की बिल्डिंग, होस्टल, क्वार्टर आदि अनिवार्य।
पर्याप्त योग्यता वाला स्टॉफ।
लेब इक्यूपमेंट व अन्य संसाधान अनिवार्य।





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