bhaskar Web English
HomeNewsMetrosJaipur Jaipur

गृहमंत्री ने माना अपराध बढ़े

जयपुर. प्रदेश में अपराधों का आंकड़ा कम होने के बजाय बढ़ रहा है। पिछले साल की तुलना में लूट के मामलों में 37.50 फीसदी, चोरी के 14.45 फीसदी व home ministerहत्या के मामलों में 9.48 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। न तो महिलाओं का उत्पीड़न रुक रहा है और न ही वाहनों की चोरियां थम रही हैं। महिला अत्याचार के मामलों में 15.88 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया का मानना है कि राज्य में महिला उत्पीड़न कानून का उसी तरह दुरुपयोग हो रहा है, जैसे अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण कानून का। महिला उत्पीड़न के मामले बढ़े जरूर हैं, लेकिन 42 फीसदी से ज्यादा मामले जांच में झूठे भी पाए गए हैं। इस साल महिला उत्पीड़न के सितंबर तक 6588 मामले दर्ज हुए थे। इनमें से 2412 मामलों में अपराध साबित नहीं होने से एफआर लगानी पड़ी है। कटारिया ने मंगलवार को सचिवालय में पुलिस विभाग के अफसरों के साथ कानून-व्यवस्था की समीक्षा भी की।

कटारिया ने बताया कि तमाम प्रयास करने के बावजूद वाहनों की चोरियां नहीं थम पा रही हैं। इसके लिए गृह विभाग केंद्र सरकार व वाहन निर्माता कंपनियों से बात कर रहा है कि वे ऐसा लॉक सिस्टम लगाएं जिससे वाहनों की चोरी रुक सके। इस लॉक सिस्टम के बिना वाहन सड़क पर नहीं आना चाहिए। उन्होंने कहा कि वाहन निर्माता कंपनियों ने वाहनों में लॉक सिस्टम का जो प्रस्ताव दिया था, उसे विभाग ने अपर्याप्त मानते हुए लौटा दिया है।

कटारिया ने बताया कि अपराध बढ़ने के साथ-साथ सजा का प्रतिशत भी बढ़ा है। पिछले साल के मुकाबले सामान्य मामलों में यह प्रतिशत 42-43 फीसदी से बढ़कर 55-56 फीसदी पर आ गया है। सीएलजी (कम्युनिटी लाइजन ग्रुप) के सुखद परिणाम सामने आए हैं। इनसे पुलिस को सूचना एकत्र करने व सांप्रदायिक झगड़ों को टालने में मदद मिली है।

दम तोड़ने लगी है केस ऑफीसर योजना
गंभीर मामलों में सजा का प्रतिशत बढ़ाने के लिए लागू की गई केस ऑफीसर योजना अब दम तोड़ने लगी है। इसमें सजा का प्रतिशत 80 फीसदी से घटकर 65 फीसदी तक रह गया है। गृहमंत्री का मानना है कि ऐसा लगता है कि इस योजना में अधिकारी मन से काम नहीं कर रहे हैं, इसलिए इसकी नए सिरे से समीक्षा की जाएगी।

न अभियोजन मंजूरी मिलती है न रिपोर्ट
भ्रष्टाचार निवारण मामलों की समीक्षा के दौरान एसीबी महकमे ने इस बात पर अफसोस जाहिर किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में विभागों ने न तो आसानी से अभियोजन स्वीकृति आती है और न ही एफएसएल तथा मूल्यांकन रिपोर्ट मिल पाती है। इससे जांच में दोषी पाए गए कर्मचारियों के खिलाफ समय पर चालान भी पेश नहीं हो पाते। एसीबी में 79 मामले तो ऐसे हैं जिनमें एफएसएल की रिपोर्ट नहीं मिली और 22 मामलों में सार्वजनिक निर्माण विभाग से मूल्यांकन रिपोर्ट नहीं भेजी गई।

एसीबी के महानिदेशक के.एस. बैंस ने इस बात पर अफसोस जताया कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में संबंधित कर्मचारी महीनों तक स्पष्टीकरण नहीं देते हैं। तीन माह तक स्पष्टीकरण नहीं देने वाले अधिकारी-कर्मचारियों और अदालत में पक्षद्रोही होने वाले कर्मचारियों को निलंबित करने का सुझाव दिया गया। यदि कोई आरोपी अदालत में चालान पेश करने तक उस पद पर नहीं रहता है, जहां उस पर मामला दर्ज किया गया है तो ऐसे मामलों में अभियोजन स्वीकृति पहले लेने की जरूरत नहीं है।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: