इंदौर. लाइन सुधार और मीटर लगाने के लिए नगर निगम ने बिजली वितरण कंपनी से २८ नवंबर को शटडाउन की मांग की है। शटडाउन मिलता है तो दो दिन पानी की सप्लाई प्रभावित रहेगी। जल वितरण व्यवस्था दुरुस्त करने के उद्देश्य से नगर निगम महू और बिजलपुर कंट्रोल रूम पर मीटर लगाएगा।
जलकार्य समिति प्रभारी मुन्नालाल यादव ने बताया कुल ११ मीटर लगना है। इसमें दो लग चुके हैं और दो २८ नवंबर को शटडाउन लेने के बाद लगेंगे। बाकी शहरी क्षेत्र में लगेंगे। हालांकि अभी शटडाउन की तारीख तय नहीं हुई है।
पश्चिमी क्षेत्र में दिनभर रही मारामारी
पंप की खराबी के कारण दो दिन से यशवंत सागर से होने वाली पानी की सप्लाई प्रभावित रही। सोमवार को बीएसएफ टंकी खाली रही जिसके चलते मंगलवार को पश्चिम क्षेत्र की कई कॉलोनियों में पानी को लेकर मारामारी रही। नाराज लोगों ने पहले तो टंकी के घेराव के बाद किला मैदान जोन पर हंगामा।
देवधरम पंपिंग स्टेशन पर एक पंप में आई खराबी के कारण मंगलवार को यशवंत सागर का पानी पश्चिम क्षेत्र की कई कॉलोनियों (कालानीनगर, शिक्षकनगर, शुक्लानगर, हुकमचंद कॉलोनी) में नहीं पहुंचा। क्षेत्रीय रहवासियों का कहना है परेशानी एक-दो दिन से नहीं बल्कि चार महीनों से है। सब्र करें भी तो कब तक? कांग्रेस नेता श्री गोधा ने महापौर डॉ.उमाशशि शर्मा से समस्या के स्थाई निराकरण की मांग की।
अगले नौ दिनों तक यदि आपके इलाके में दिन में स्ट्रीट लाइटें जगमगाएं तो चौंकिएगा नहीं। दरअसल नगर निगम ने मंगलवार से ऊर्जा बचत योजना के तहत स्ट्रीट लाइटों का सर्वे शुरू किया है। इसके अंतर्गत शहरभर के विभिन्न क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटें जलाकर बिजली के दबाव को जांचा जा रहा है। सर्वे में यह भी देखा जा रहा है कि संबंधित क्षेत्र में कितनी स्ट्रीट लाइटें हैं। ट्यूबलाइटों और सोडियम लैम्प की संख्या भी जुटाई जा रही है।
नगर निगम के असिस्टेंट इंजीनियर राकेश अखंड के मुताबिक मंगलवार को संगमनगर, गुमाश्तानगर, धार रोड (कस्तूर टॉकीज वाला इलाका), व्हाइट चर्च कॉलोनी, सांघी कॉलोनी, धेनु मार्केट और मेडिकल कॉलेज के आसपास के इलाके में सर्वे के तहत सुबह 10 से 12 बजे तक स्ट्रीट लाइटें जलाकर जांच की गई। शहरभर के 40 पॉइंट चिह्न्ति किए गए हैं जहां क्षेत्रवार यह सर्वे किया जाएगा। यह काम 10 दिनों में पूरा करना है।
दिन में ही क्यों होता हैे सर्वे
नगर निगम ने शहर में 224 जगह सिस्टम लोड मॉनीटरिंग सिस्टम पैनल लगाए हैं। इन पैनल से ही लाइटें ऑन-ऑफ होती हैं, वोल्टेज का उतार-चढ़ाव तय किया जाता है। इस पैनल में एक बड़ा एरिया कवर होता है इसलिए यदि किसी विशेष कॉलोनी की स्ट्रीट लाइटों का सर्वे करना हो तो इसके लिए अलग से सप्लाई देना होगी। रात में यदि सर्वे होगा तो उसके मीटर में सारे क्षेत्र की रीडिंग आएगी।
फिलहाल किया जा रहा सर्वे सैंपल सर्वे है जिसमें हम 40 पैनलों का सर्वे करेंगे। क्षेत्र चुनने में इस बात का ध्यान रखा गया है कि शहर की हर श्रेणी (अपर, मिडिल और लोअर) की कॉलोनियां शामिल हो सकें। दिन में स्पेशल सप्लाई देने में विद्युत वितरण कंपनी को दिक्कत नहीं होती।
सर्वे के लिए विद्युत वितरण कंपनी के चारों जोन अधिकारियों सहित सभी बड़े अधिकारियों को पत्र द्वारा शिड्यूल भेजकर दिन में दो घंटे बिजली सप्लाई चालू करने का आग्रह किया गया था।
हर साल होगा सर्वे
निगम अफसरों के अनुसार विद्युत-ऊर्जा बचत योजना का काम कर रही नई दिल्ली की एशियन इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी ने कहा था कि वह हर साल बिजली के बिल में हर साल 42 प्रतिशत बचत कर देगी। इसके आकलन के लिए हर साल सर्वे किया जाएगा।
पिछले साल भी ऐसा ही सर्वे किया गया था जिसमें पता चला था कि सीएफएल स्ट्रीट लाइटें लगाने से बिजली के बिल में करीब 30 प्रतिशत तक की बचत हुई थी। सामान्य तौर पर जो बिल 45 लाख आता था वह घटकर करीब 33 लाख रह गया।