उज्जैन. सांवेर में सोमवार को हुए उपद्रव में मारे गए ग्राम उमरिया के जाकिर का शव मंगलवार को पुलिस सुरक्षा के बीच दफना दिया गया। इसी के साथ क्षेत्र में पिछले २४ घंटों से चल रही शांति भंग की अटकलें भी दफन हो गईं।
इंदौर के अरबिंदो अस्पताल से जाकिर का शव पुलिस द्वारा तड़के साढ़े तीन बजे लाया गया। सुबह ११ बजे गांववालों की मौजूदगी में शव को दफनाया गया। बड़नगर थाने के एएसआई डी.पी. शर्मा के मुताबिक गांव में दिनभर शांति का माहौल रहा। स्कूल, बाजार रोज की तरह खुले और जनजीवन सामान्य रहा। जाकिर के घर जरूर मातम छाया हुआ था।
दिनभर वहां दोस्त और रिश्तेदार गमी में शामिल होने के लिए आते रहे। गांव के एकमात्र हिंदू परिवार के अशोक प्रजापति भी जाकिर के गम में शामिल हुए। स्थिति संभालने के लिए उज्जैन और रतलाम से बुलाया गया अतिरिक्त पुलिस बल अभी भी उमरिया से हटाया नहीं गया है। शांति के वातावरण में पुलिस की गश्त जारी थी।
कुछ सामान्य हुआ शाकिर
घटना का चश्मदीद जाकिर का पुत्र शाकिर मंगलवार को कुछ सामान्य हालत में रहा। सोमवार को वह बदहवास सा था और मारे दहशत के कुछ बोल तक नहीं पा रहा था। मंगलवार को वह घर आया और पिता को याद करता रहा।
जुम्मे पर हुई थी आखिरी मुलाकात
दोस्तों और गांववालों को जाकिर की अच्छाइयां बेसाख्ता याद आने लगी थीं। सब जाकिर के व्यवहार और सरोकार को भूल नहीं पा रहे थे। जाकिर के किसान मित्र हाफिज हिदायुद्दीन ने बताया कि मैं उसे बचपन से जानता था। सज्जन और नेकदिल इंसान था वो। न किसी से खटपट न ही कोई फसाद। अभी गए जुम्मे पर मिलना हुआ था तो इधर-उधर की बातें हुईं। वही आखिरी मुलाकात थी।
जाकिर की मौत से गांव ने खोया एक कुशल कारीगर
नवोदित सक्तावत .
सांप्रदायिकता की आग ने सोमवार को उमरिया के एक इंसान को लील लिया। पुलिस ने हालांकि अंतिम बिंदु तक हालात काबू में रखे लेकिन सुनी-सुनाई बातों ने गांववालों का चैन जरूर छीन लिया। घटना वाली रात मृतक जाकिर का गांव उमरिया गम के दोहरे अंधेरे में डूबा रहा। अव्वल तो जाकिर की दर्दनाक मौत का दर्द, दूसरे गांव में बिजली कटौती। इससे पूरे इलाके में लोग घरों में ही दुबके रहे।
घुप्प अंधेरे में बातें करते लोग जाकिर को याद करके मन की तसल्ली करते सुनाई पड़े। वह जाकिर जो अपने काम में माहिर था और जाने कितने नेताओं के आशियानों की नींव उसने ही रखी थी। उसकी दर्दनाक मौत का समाचार गांववालों के लिए किसी झटके से कम नहीं था। लोग हालांकि चुप थे लेकिन इसमें डर और गुस्सा छिपा हुआ था।
पिछले १५ सालों से ठेकेदारी और निर्माण कार्यो में हाथ आजमा रहे जाकिर के काम को गांववालों ने खूब याद किया। किसी ने कहा कि उनका तजुर्बा खासा था तो किसी ने फन की तारीफ की। बड़नगर व आसपास के गांवों में निर्माण कार्य कर चुके जाकिर ने क्षेत्र के नामचीन लोगों के यहां भी काम किया था।
एमवायएच ने पुलिस को नहीं दिया शव वाहन
इंदौर.
सांवेर के तनाव में उलझे पुलिसवालों को मंगलवार को एमवाय अस्पताल प्रबंधन से भी शव वाहन को लेकर भिड़ना पड़ा। पुलिस वाले मांग कर रहे थे कि अनवर का शव अस्पताल के शव वाहन से ही भेजा जाए जबकि अधीक्षक सी.वी. कुलकर्णी ने इससे इनकार कर दिया। मामला उलझते देख सीएसपी इरमिन शाह ने बताया तुरत-फुरत निजी शववाहन बुलाकर सांवेर रवाना किया।
सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात एक बजे भी इसी को लेकर अस्पताल में विवाद हुआ था जब जाकिर का पोस्टमॉर्टम करने के बाद उसका शव बड़नगर भेजा जाना था। अस्पताल के पास शव वाहन रहते हुए भी ऐसे मौके पर क्यों नहीं दिया गया? यह पूछने पर एमवाय अस्पताल की पीआरओ अनीता मूथा ने बताया शव वाहन की स्थिति जर्जर है। हमें डर था कि कहीं रास्ते में बंद न हो जाए इसलिए नहीं दिया। नए वाहन के लिए बजट में प्रस्ताव भेजा है।