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झलकी बेकरारी

ग्वालियर. एरोड्रम से इंदरगंज की ओर मुख्य सड़क पर दौड़ता प्रशासन की गाड़ियों का काफिला, काफिले के बीच दो एसी बसें जिनमें सवार भारत व पाक क्रिकेट टीम के सदस्य यहां तक तो सब ठीक पर यह क्या काफिले के ठीक पीछे बसों के बराबर ही तेज रफ्तार में दौड़ती दर्जनों मोटरसाइकिलें जिनपर सवार युवा, यह दृश्य काफी है शहरवासियों की क्रिकेट नहीं बल्कि क्रिकेटरों के प्रति दीवागनी के लिए। fans

ऐसे दृश्य केवल टीम के होटल पहुंचने के दौरान ही नहीं दिखे बल्कि शहर की हर उस सड़क पर क्रिकेटर प्र्रेमियों की खासी भीड़ रही जहां से क्रिकेटरों के गुजरने की अंश मात्र भी संभावना थी। क्रिकेटर प्रेमी दीवानगी हदो को पार कर क्रिकेटरों के दीदार को बेताब थे कुछ ने तो दीदार में परेशानी के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने से भी गुरेज नहीं किया।

खिलाड़ियों को होटल पहुंचाना जिम्मेदारी
धोनी, युवराज, शोएब व आफरीदी के दीवाने सिटी सेंटर निवासी आशीष, उमेश व राजेंद्र का कहना था कि टीम एयरोड्रम पर उतरने के बाद यूकेपी पहुंचेगी यह जानकारी पहले ही मिल गई थी। हमने तय किया कि प्रशासन चाहे जो इंतजाम करे खिलाड़ियों को होटल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी हमारी है अत: हम दो बजे ही टीम की अगवानी करने पहुंच गए व टीम के साथ होटल आए। टीम को होटल छोड़ दिया है अब घर जा रहे हैं कल सभी खिलाड़ियों से नैट प्रेक्टिस के दौरान मुलाकात होगी।

नहीं देख सकती धोनी को खेलते हुए
हजीरा निवासी अनीता कहती हैं कि इसमें कोई शक नहीं कि धोनी से विवाह का प्रस्ताव मिलने पर में एक सेकण्ड के लिए भी नहीं सोचूंगी। धोनी को खेलते हुए देखना मेरे लिए किसी भी अन्य कार्य से महत्वपूर्ण है पर उसकी असफलता मुझे बुरी तरह डरा देती है यही कारण है कि मैं धोनी को रूबरू खेलते हुए नहीं देख सकती और यह संभव नहीं कि धोनी शहर आए और मैं उससे मिलने का प्रयास न करू।

इसी प्रयास के तहत यूकेपी के बाहर उसका इंतजार कर रही थी धोनी को देखकर दिल को सुकून मिल गया बुधवार को उसे प्रैक्टिस करते जरूर देखूंगी पर १५ को स्टेडियम के आसपास भी नहीं जाऊंगी जितनी देर धोनी बैटिंग करेगा उतनी देर टीवी के सामने भी नहीं रहूंगी।

प्रशासन ने किया अन्याय
पड़ाव चौराहे पर खिलाड़ियों का इंतजार करने वाले ग्वालियर निवासी राकेश, राजीव व दीपक का कहना है कि प्रशासन व जीडीसीए ने ग्वालियर वासियों के साथ न्याय नहीं किया। उनका कहना है कि यह सही हो सकता है कि मुंबई में ज्यादा लोग रहते हों पर क्रिकेट की दीवानगी में ग्वालियराइड्स किसी से कम नहीं।

अगर खिलाड़ी एयरोड्रम से वानखेड़े स्टेडियम तक खुली बस में बरसते पानी में जा सकते हैं तो ग्वालियर में उन्हें खुली बस में लाने में क्या दिक्कत हो सकती है। अगर प्रशासन ऐसी व्यवस्था करता तो सभी को खिलाड़ियों का दीदार आसानी से हो जाता व सभी को बहुत खुशी होती। प्रशासन हमेश बड़े शहरों के मुकाबले छोटे शहरों के निवासियों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार करता है।

प्रशासन खलनायक साबित हो रहा है
खिलाड़ियों के ऑटोग्राफ की आस लिए यूकेपी पहुंचे लश्कर निवासी अनिल, आशुतोष रीना व दिनेश का कहना है कि प्रशासन क्रिकेट प्रेमियों व क्रिकेटरों के बीच दीवार बनकर अपने को खलनायक साबित कर रहे हैं।

सभी शहरों में लोगों को खिलाड़ियों से मिलने की छूट दी जाती है, हजारों लोगों के पास क्रिकेटरों के ऑटोग्राफ होते हैं पर यहां तो सुरक्षा को बहाना बनाकर प्रशासनिक अधिकारी उन्हें क्रिकेटरों के पास फटकने नहीं दे रहे। उनका कहना है कि इससे तो अच्छा होता कि वे किसी अन्य शहर में जाकर मैच देखते व खिलाड़ियों से न केवल मुलाकात करते बल्कि उनसे ऑटोग्राफ भी हासिल करते।

पढ़ाई कार्यक्रम तीन दिन स्थगित
इंजीनियरिंग छात्र रत्नम, साहिल, तन्मय व चीनू का कहना है कि वैसे तो वे अपनी पढ़ाई को कभी डिस्टर्ब नहीं होने देते, उन्होंने भारत पाक के बीच होने वाले पहले तीनों मैच भी केवल अंत के १क् ओवर के ही देखे हैं पर ग्वालियर में टीम आने की खबर ने उन्हें दीवाना कर दिया है, पढ़ाई का कार्यक्रम तीन दिन के लिए स्थगित कर दिया है।

दोपहर दो बजे से गोलेके मंदिर पर खड़े हैं क्योंकि खिलाड़ी बस में सवार होकर आखिर गुजरेंगे तो यहीं से, यहां चौराहे पर अक्सर जाम की हालत रहती है ऐसे में उनका पूरा दीदार तो हो जी जाएगा। यहां से सभी लोग यूकेपी जाएंगे व बुधवार को सभी से स्टेडियम में मुलाकात करने का प्रयास करेंगे।





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