जयपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने कोटा की सुदर्शन मिल को बंद करने के औद्योगिक न्यायाधिकरण के आदेश को गैरकानूनी ठहराया है। साथ ही कोर्ट ने मिल कर्मचारियों
को सभी वेतन लाभ देने का आदेश दिया है। इस आदेश के बाद मिल के 800 कर्मचारियों को 22 साल बाद न्याय मिला है।
मामले के अनुसार सुदर्शन मिल कोटा के प्रबंधकों ने 1984 में मिल बंद करने की राज्य सरकार से इजाजत मांगी थी। सरकार ने इसे नामंजूर कर दिया था। सरकार ने इसे कोटा के औद्योगिक न्यायाधिकरण में फैसले के लिए भेजा। 6 मार्च, 1985 को न्यायाधिकरण ने मिल बंद करना सही बताया था, साथ ही राज्य सरकार के अग्रिम आदेश तक कारखाने को बंद नहीं करने को कहा था। इसके बाद मिल प्रबंधकों ने कारखाने में तालाबंदी कर दी थी।
मजदूर यूनियन ने एकल पीठ के फैसले के खिलाफ खंडपीठ में अपील की। न्यायाधीश शिवकुमार शर्मा व महेश शर्मा की खंडपीठ ने औद्योगिक न्यायाधिकरण के फैसले को गैरकानूनी बताते हुए निरस्त कर दिया।