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कब्र से निकलेगी लाश खोलेगी कई राज!

जीरकपुर भबात में ४0 वर्षीय व्यक्ति का शव आठ दिन के बाद पोस्टमार्टम के लिए बुधवार को उसकी कब्र खोदकर निकाला जाएगा। यह फैसला एसडीएम ने मृतक की मां की गुहार पर किया है।

मां ने बेटे की मौत को हादसा मानने के बजाय कत्ल की आशंका जताई है। मां ने आरोप लगाया कि गुरनाम अली को उसकी पत्नी ने अपने दो बेटों के साथ मिलकर मारा है या मरवाया है। गांव भबात में ५ नवंबर की रात गुरनाम अली की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। अगले दिन उसका शव गांव के कब्रिस्तान में दफना दिया गया। तीन दिन बाद मां ने इस मौत के लिए गुरनाम के परिवार पर आशंका जताते हुए पोस्टमार्टम कराने के लिए पुलिस में अपील की। पुलिस ने अपील एसडीएम तक पहुंचाई। एसडीएम ने शव के पोस्टमार्टम की मंजूरी दे दी।

एसडीएम सोहनलाल भुंबक के अनुसार गुरनाम का शव कब्र से खोद बाहर निकाल कर पोस्टमार्टम के लिए डेराबस्सी सिविल अस्पताल पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस को सीआरपीसी १७४ के तहत मामला दर्ज करने के लिए कहा गया है। यह कार्रवाई ड्यूटी मजिस्ट्रेट और पुलिस की उपस्थित में अंजाम दी जाएगी।

‘छाती पर नुकीली वस्तु का जख्म’

गुरनाम की मां नसीबो, भाई जागर खान और बहन कुलदीप ने आरोप लगाया कि गुरनाम की छाती पर बाईं तरफ नुकीली वस्तु का जख्म था। इसकी पुष्टि गांव के डॉक्टर बंगाली ने भी की, जिसने जख्म पर स्टिच लगाया था। नसीबो के मुताबिक गुरनाम का शव आनन-फानन में ज्ञानदेवी के रिश्तेदारों ने दफना दिया। उन्हें बाद में गुरनाम के पड़ोसियों से पता चला कि वह खून से लथपथ था और काफी देर गली में पड़ा रहा। उसने आरोप लगाया कि गुरनाम के खून से सने कपड़े भी खुर्दबुर्द कर दिए गए हैं। उन्होंने साफ आरोप लगाया कि गुरनाम को उसके बेटों और पत्नी ने मारा है या मरवाया है।

19 साल पहले हुई थी शादी: मृतक की विधवा ज्ञानदेवी अपने दो बेटे रोहित व मोहित के साथ जद्दी मकान में रहती है जबकि गुरनाम की माता व दो भाई गांव में ही बीते आठ साल से अलग किराये पर रह रहे हैं। ज्ञानदेवी ने बताया कि गुरनाम से उसकी शादी 19 वर्ष पहले हुई थी। गुरनाम ने उसे कभी खर्चा नहीं दिया और वह खुद नौकरी कर घर चला रही है। गुरनाम ज्यादातर मटौर में अपनी बहन कुलदीप और मां के पास रहता था।

बीती 5 नवंबर की रात वह नशे में घायलावस्था में उसके पास आया। उसकी छाती में चोट होने पर वह उसे प्राइवेट क्लीनिक ले गई जहां से गुरनाम को दो अन्य प्राइवेट अस्पतालों में भी दिखाया गया, लेकिन गुरनाम तब तक दम तोड़ चुका था। गुरनाम को चोट कैसे लगी, उसे नहीं पता पर वह अपने भाई-बहनों से मिलकर ही यहां पहुंचा था।





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