News
Metros
Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. महंगी बिजली खरीद कर सस्ती दरों पर जनता को उपलब्ध कराना पंजाब सरकार को महंगा पड़ रहा है। हालत यह है कि पंजाब राज्य बिजली बोर्ड पर 10657 करोड़ रुपए का कर्ज चढ़ गया है। साल भर के भीतर कर्ज चढ़ने की रफ्तार तेजी से बढ़ी है।
पिछले चालीस सालों में पंजाब राज्य बिजली बोर्ड पर मात्र 6000 करोड़ रुपए का कर्ज चढ़ा था, मगर 12 महीनों में यह पांच हजार करोड़ तक बढ़ चुका है।
कर्ज सीमा दोगुनी कर चुका है पंजाबदिलचस्प बात यह है कि सितंबर-2006 तक बोर्ड की कर्ज लेने की सीमा 6000 करोड़ थी, जिसे एक ही वर्ष में दो बार बढ़ाकर 11 हजार करोड़ रुपए कर दिया गया है और इस समय इस आंकड़े को छूने के लिए मात्र 343 करोड़ रुपए बाकी है। महंगी बिजली खरीदकर जिस प्रकार से उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर उपलब्ध करवाई जा रही है, उससे लगता है इस वर्ष के अंत तक यह सीमा भी पार कर ली जाएगी।
पांच माह में देना है 2688 करोड़किसानों, एससी, बीपीएल परिवारों के बाद अब घरेलू बिजली पर दी जा रही सब्सिडी को यदि जोड़ दिया जाए तो इस वित्तीय वर्ष के अंत तक राज्य सरकार को बोर्ड को 2688 करोड़ रुपए देने होंगे। राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है 292 करोड़ रुपए की घरेलू सब्सिडी देने के फैसले से पॉवर रिफॉर्म्स को जोरदार झटका लगा है। सरकार को बोर्ड को पिछले बकाए सहित 3418 करोड़ देने हैं। 3418 करोड़ में से 1988 कृषि,130 एससी, बीपीएल परिवार, 423 करोड़ का पिछला बकाया, 579 करोड़ रुपए का कैपिटल डाइवरसिफिकेशन और 292 करोड़ घरेलू सब्सिडी का शामिल है।
रिव्यू बैठक आज
बोर्ड की खस्ता हो रही हालत का जायजा लेने के लिए बुधवार को एक बैठक बुलाई गई है। इसमें सब्सिडी, उत्पादन, लॉसेस, आमदनी, खर्च और बोर्ड के निगमीकरण करने जैसे मुद्दों पर विचार किया जाएगा। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और मुख्य सचिव आर.आई. सिंह, बिजली विभाग के सचिव सुरेश कुमार, बोर्ड के चेयरमैन वाई.एस. रतड़ा और अन्य सदस्य भी इसमें शामिल होंगे।