शिलांग.भारी वर्षा के लिए विख्यात चेरापूंजी को भी आजकल जलसंकट झेलना पड़ रहा है। मेघालय की राजधानी शिलांग से 56 किलोमीटर दूर स्थित चेरापूंजी में हर साल खासकर मॉनसून के बाद और जाड़े के दिनों में पानी की किल्लत हो जाती है। इस विचित्र समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार इजरायली विशेषज्ञों की मदद ले रही है।जलसंकट से जूझते लोगों की मुश्किलें दूर करने के लिए राज्य सरकार ने इजरायली कृषि मंत्रालय के सेंटर फॉर इंटरनेशनल एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट कोऑपरेशन (सीआईएडीसी) के साथ चेरापूंजी तथा राज्य के अन्य भारी वर्षा वाले इलाकों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के लिए तकनीकी सहयोग का समझौता किया है।
मेघालय के मुख्य सचिव राजन चटर्जी के मुताबिक, सीआईएडीसी रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और इसके लिए ढांचागत निर्माण के बारे में लोगों को शिक्षित करने के अलावा बंजर भूमि को फिर से हरा-भरा करने के लिए धन भी मुहैया कराएगा।
चेरापूंजी कुछ तथ्यप्रचलित नाम: चेरापूंजी,
आधिकारिक व स्थानीय नाम: सोहरा,वर्षा का औसत: 11,430 मिलीमीटर प्रतिवर्ष,
एक दिन में सर्वाधिक वर्षा का रिकार्ड: 1974 में 2455 मिलीमीटर।