नई दिल्ली. संसद के गुरुवार से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र के नंदीग्राम हिंसा और एटमी करार जैसे मुद्दों से गरमाने की संभावना है। गेहूं आयात और किसानों की समस्याएं भी सत्र के दौरान विपक्षी दलों के तरकश में तीर का काम करेंगी।
तीन हफ्तों के इस सत्र में नंदीग्राम मुद्दा लोकसभा और राज्यसभा में छाया रह सकता है। यूपीए तथा वामदलों में गतिरोध घटने के संकेतों के बीच यह मुद्दा एटमी करार को पीछे छोड़ सकता है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने बताया कि इस मामले को दोनों सदनों में जोरदार ढंग से उठाया जाएगा। वे मंगलवार को ही राज्यसभा में भाजपा संसदीय दल की उपनेता सुषमा स्वराज के साथ नंदीग्राम का दौरा कर लौटे हैं।
भाजपा एटमी करार के खिलाफ नहीं:
आडवाणी ने बताया कि उनकी पार्टी एटमी करार के विरुद्ध नहीं है और न ही अमेरिका से संबंध बिगाड़ना चाहती है। वह सिर्फ देशहित विरोधी अंश निकलवाना चाहती है। पार्टी करार पर नियम १८४ के तहत बहस और मत विभाजन चाहती है।
वामदल बढ़ती महंगाई से खफा :
उधर, वामदलों ने संकेत दिया है कि वे बढ़ती महंगाई से खफा हैं। तीसरा मोर्चा इस मामले को उनके साथ उठाने की योजना बना रहा है।
रामसेतु मुद्दा उठने नहीं देगी सरकार :
सूत्रों के अनुसार सरकार की कोशिश यही रहेगी कि भाजपा रामसेतु का मुद्दा नहीं उठा पाए। यह सत्र 7 दिसंबर को समाप्त होगा।