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अभिमत. टीम इंडिया के चयन में अक्सर कुछ ऐसी चूक हो जाती है कि चयनकर्ताओं को आलोचना का शिकार होना पड़ता है। पाकिस्तान के खिलाफ दो टेस्ट मैचों के लिए घोषित टीम में गौतम गंभीर, इरफान पठान व वीरेंद्र सहवाग को नहीं लिए जाने से यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या किसी खिलाड़ी के वर्तमान फॉर्म का कोई तात्पर्य नहीं है।
लगातार अच्छा खेल रहे गंभीर का चयन नहीं किए जाने के पीछे कोई तर्क समझ में नहीं आता है। इसी तरह इरफान पठान को बाहर रखने से एक शुद्ध ऑलराउंडर की कमी रह गई है।
सहवाग को वनडे टीम में चुनते समय कहा गया था कि वे पाकिस्तान के खिलाफ अच्छा खेलते हैं इसलिए मौका दिया जा रहा हैं। फिर उन्हें टेस्ट टीम में क्यों नहीं लिया गया? यदि पिछला रिकॉर्ड ही देखना है तो सहवाग पाकिस्तान के खिलाफ तिहरा शतक लगा चुके हैं। फिर वे बाहर क्यों किए गए?
यह सही है कि इस बार चयनकर्ताओं के लिए टीम चुनना आसान नहीं था। एस. बद्रीनाथ, पार्थिव पटेल, मनोज तिवारी और सुरेश रैना भी जबरदस्त फॉर्म में होने के कारण चयन के दावेदार थे। चयनकर्ताओं ने अंतत: तीन स्पिनर व तीन तेज गेंदबाजों का चयन किया जिससे एक बल्लेबाज कम करना पड़ा।
भारतीय गेंदपट्टी पर वैसे भी स्पिनर ज्यादा सफल रहते हैं इसलिए हो सकता है कि टेस्ट में तीनों स्पिनरों-हरभजन सिंह, अनिल कुंबले व मुरली कार्तिक को खेलते देखा जाए। गंभीर को दिनेश कार्तिक के स्थान पर लिया जा सकता था लेकिन कार्तिक का पक्ष इसलिए मजबूत हुआ क्योंकि वे इंग्लैंड में टेस्ट में खासे सफल रहे।
जब लगा कि वे फॉर्म खो रहे हैं तो चैलेंजर ट्रॉफी के फाइनल में नाबाद शतक लगाकर उन्होंने चयनकर्ताओं का विश्वास जीता। वे विकेटकीपर भी हैं तथा क्लोज इन क्षेत्र में बढ़िया फील्डिंग भी करते हैं। घोषित टीम में वसीम जाफर के स्थान पर गौतम गंभीर और एस.श्रीसंथ के स्थान पर इरफान पठान का चयन किया जाता तो बेहतर होता।