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आलेख. हाल ही में जारी चालू वित्तीय वर्ष की पहली छमाही के आधिकारिक आंकड़े, यद्यपि विकास की मंदगति स्पष्ट रूप से दिखाते हैं फिर भी मौजूदा विकास दर की जो लय और गति है उसे ध्यान में रखते हुए संतोषजनक ही कहा जा सकता है।
इस छमाही में औसत विकास दर 9.2 प्रतिशत रही जबकि पिछले वर्ष 2006-7 में इसी अवधि में यह 11.1 प्रतिशत थी। विकास दर में ऐसे उतार-चढ़ाव तो अपेक्षित ही होते हैं, संतोष की बात यह है कि कुल मिलाकर विकास दर 10 प्रतिशत के आसपास ही मंडरा रही है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि दीर्घकालिक पूंजी निवेश के मद्देनजर उत्पादन के लिहाज से उद्योगों का प्रदर्शन अप्रैल-सितंबर 2007 के दरम्यान अच्छा ही रहा। इसी अवधि में नॉन मैटलिक इंडस्ट्रीज का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा और लगभग ऐसा ही रुझान ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में भी देखने को मिला। अगली छमाही के लिए औद्योगिक मोर्चे पर इस रुझान को शुभ संकेत कहा जा सकता है।
जहां तक निर्माण क्षेत्र का सवाल है तो पहली छमाही में औसत उत्पादन 10 प्रतिशत का रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 12.2 प्रतिशत था। यह दो साल पहले 9.5 प्रतिशत के मुकाबले मामूली सी बढ़त है। बहरहाल हम कह सकते हैं कि निर्माण क्षेत्र का प्रदर्शन दो वर्षो से कमोबेश एक सा ही बना हुआ है।
औद्योगिक उत्पादन के सूचकांक के दो मुख्य घटकों में खनिज क्षेत्र की विकास दर पिछले साल 3.1 प्रतिशत के मुकाबले 5.3 प्रतिशत रही, जबकि विद्युत उत्पादन पिछले साल 6.6 प्रतिशत के मुकाबले 7.7 प्रतिशत रहा।
लेकिन निर्माण क्षेत्र जिसका औद्योगिक उत्पादन के सूचकांक में सबसे महत्वपूर्ण योगदान होता है, से इस अवधि में थोड़ा आघात पहुंचा और यही औद्योगिक उत्पादन की विकास दर में सुस्ती लाने के लिए जिम्मेदार है। लेकिन इससे निराश होने जैसी कोई बात नहीं, जो संभावनाएं दिख रही हैं उसे व्यापक परिप्रेक्ष्य में संतोषजनक माना जा सकता है।
औद्योगिक उपलब्धि के आंकड़ों का गहराई से अध्ययन करने के बाद कहा जा सकता है कि इस वर्ष की औद्योगिक विकास दर की प्रवृत्ति व्यापक आधार वाली है। उद्योगों के एक बड़े समूह ने इस छमाही में अच्छी विकास दर दर्ज कराई है, जिनका प्रदर्शन फिसड्डी रहा उनकी संख्या कम ही है।
अप्रैल-सितंबर 2007 की अवधि में खाद्य उत्पादों में 13.3 प्रतिशत, बेवरेज और तंबाकू में 8.3 प्रतिशत, जूट और उससे संबंधित टेक्सटाइल में 18.9 प्रतिशत, रबर और उससे संबंधित वस्तुओं में 12.0 प्रतिशत, नॉन मैटलिक प्रोडक्ट में 8.3 प्रतिशत, बेसिक मेटल्स में 18.5 प्रतिशत और मशीनरी उपकरणों में 10.9 प्रतिशत, पिछले वर्ष इसी अवधि की छमाही के मुकाबले अपेक्षाकृत अधिक विकास दर दर्ज की गई है।
आंकड़ों में विकास दर का कमजोर प्रदर्शन(1.1 प्रतिशत) मेटल प्रोडक्टस एंड पार्ट में -0.8 प्रतिशत और ट्रांसपोर्ट उपकरणों में 1.7 प्रतिशत रहा। यथार्थ के धरातल पर खड़े होकर यदि हम औद्योगिक सूचकांक का विश्लेषण करें तो हमारे सामने जो औद्योगिक परिदृश्य उभरता है, वह निश्चित ही उम्मीदों को जगाने वाला है।
जहां तक बेसिक गुड्स का सवाल है तो इनके उत्पादन में औसत बढ़ोतरी पिछले साल 8.8 प्रतिशत के मुकाबले इस साल 9.9 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि कैपिटल गुड्स के उत्पादन का इजाफा पिछले साल 17.5 प्रतिशत के मुकाबले इस साल 19.6 प्रतिशत का रहा।
इनवेस्टमेंट गुड्स में विकास दर की बढ़त आने वाले महीनों में औद्योगिक गतिविधियों की दिशा पर निर्भर करेगी। इंटरमीडिएट गुड्स में सुधार परिलक्षित हुआ है, यह पिछले साल 10.9 प्रतिशत के मुकाबले 9.5 प्रतिशत के मामूली अंतर से ही पीछे है।
कंज्यूमर गुड्स क्षेत्र के प्रदर्शन को अपवादस्वरूप मान लें तो कुल मिलाकर वर्ष 2007-8 की पहली छमाही के प्रदर्शन को संतोषजनक ही कहा जा सकता है। कंज्यूमर गुड्स क्षेत्र की विकास दर महज 5.5 प्रतिशत रही जो पिछले वर्ष की इस अवधि के मुकाबले लगभग आधी है। इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण बात यह है कि नॉन ड्यूरेबल कंज्यूमर गुड्स का प्रदर्शन अपेक्षाकृत अच्छा रहा।
पिछले साल 10.2 प्रतिशत की विकास दर के मुकाबले इस साल यह थोड़ा ही पीछे 8.4 प्रतिशत रहा। जबकि कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर की प्रगति नकारात्मक -3.2 प्रतिशत दर्ज की गई। वस्तुत: विकास दर को आघात इसी क्षेत्र से लगा, क्योंकि वर्ष 2006-7 में इस क्षेत्र ने इसी अवधि में 15.2 प्रतिशत की आकर्षक विकास दर हासिल की थी।
इस वित्तीय वर्ष की प्रथम छमाही में औद्योगिक विकास दर की गति भले ही मंद रही हो पर इसके आगे बढ़ने की जो लय और गति है और उससे जो परिदृश्य उभरता है, उसे देखते हुए कह सकते हैं कि वित्तीय वर्ष की अगली छमाही में विकास दर 10 प्रतिशत के आसपास रहने के भरोसे को नहीं तोड़ेगी।
-लेखक आर्थिक मामलों के विश्लेषक हैं।