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जयपुर. सिविल लाइंस और सी-स्कीम जैसे पॉश इलाकों में भी अब ऊंची-ऊंची अट्टालिकाएं बनाई जा सकेंगी। इन क्षेत्रों में सरकार ने प्रशासनिक आदेश से अभी तक बिल्डिंगों की अधिकतम ऊंचाई 15 मीटर तय कर रखी थी। अब राज्य सरकार ने इस प्रशासनिक आदेश को ही वापस लेने का फैसला किया है। इसके बाद अब इन क्षेत्रों में भी सड़क की चौड़ाई के डेढ़ गुना और अग्र सेटबेक के बराबर ऊंची बिल्डिंगें बनाई जा सकेंगी।
राजधानी जयपुर के बाहरी क्षेत्रों में बहुमंजिला भवनों को राज्य मंत्रिमंडल ने सकरुलेशन के जरिए मंजूरी दे दी है। नए भवन निर्माण नियमों के तहत अब कम से कम एक हजार वर्गमीटर के भूखंड पर ही ऊंची बिल्डिंगें बनाई जा सकेंगी। बहुमंजिला भवनों में नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुसार सेटबैक छोड़ने जरूरी होंगे। शहर में बहुमंजिला भवनों का स्वरूप तय करने के लिए पिछले दिनों तीन सदस्यीय मंत्रिमंडलीय उप समिति बनाई गई थी। इस समिति में संसदीय कार्यमंत्री राजेन्द्रसिंह राठौड़, जल संसाधन मंत्री प्रो. सांवरलाल और स्वायत्त शासन राज्यमंत्री प्रतापसिंह सिंघवी थे। मंत्रिमंडल ने उप समिति की सिफारिशों को ज्यों का त्यों मंजूर कर दिया है। इसके आदेश एक-दो दिन में जारी होने की संभावना है।
शहर के हैरिटेज महत्व को ध्यान में रखते हुए हैरिटेज क्षेत्र एवं प्रतिबंधित सड़कों पर बहुमंजिला इमारतों की अनुमति नहीं दी जाएगी। स्वायत्त शासन एवं नगरीय विकास विभाग के अनुसार नए नियमों के तहत अब बिल्डर्स को सड़क की मौजूदा चौड़ाई से डेढ़ गुना और अग्र सेटबैक के बराबर बिल्डिंग की ऊंचाई ले जाने की छूट होगी। सड़क की चौड़ाई मास्टर प्लान के हिसाब से नहीं, बल्कि मौके की स्थिति से मानी जाएगी। हालांकि नियमों में यह प्रावधान अभी भी है, लेकिन व्यवहारिक तौर पर बिल्डर्स को सड़क की चौड़ाई के बराबर ही ऊंचाई मिल रही है।
पहले क्या था
* बहुमंजिला भवन के लिए भूखंड का न्यूनतम क्षेत्रफल 750 वर्गमीटर अथवा 900 वर्गगज था।
* 1500 वर्गगज से बड़े भूखंड पर बहुमंजिला आवासीय योजना बनाने के लिए राज्य सरकार की अनुमति जरूरी थी।
* 1500 वर्गगज के भूखंड पर एक बेसमेंट और इससे बड़े भूखंडों पर दो बेसमेंट तक बनाने की छूट थी।
* छोटे-छोटे भूखंडों को जोड़कर बड़ा भूखंड बनाकर बहुमंजिला भवन बनाने की छूट नहीं थी।
अब नया क्या होगा?
* बहुमंजिला भवन के लिए भूखंड का क्षेत्रफल कम से कम 1000 वर्गमीटर होना चाहिए।
* 1500 वर्गगज से बड़े भूखंडों पर निर्माण के लिए अब सरकार की अनुमति जरूरी नहीं होगी। इसके लिए उप विभाजन नियमों में संशोधन होगा।
* 2000 वर्गमीटर या इससे बड़े भूखंडों पर पार्किग के लिए तीन बेसमेंट बनाए जा सकेंगे
* बिल्डर्स को बहुमंजिला भवनों में विकल्प के तौर पर एक से अधिक स्टिल्ट (पार्किग स्थल) बनाने की छूट होगी।
* छोटे-छोटे भूखंडों को जोड़कर बहुमंजिले भवन बनाए जा सकेंगे। ऐसे मामलों में यदि मूल भूखंड से देय एफएआर से ज्यादा एफएआर दी जाती है तो बिल्डर्स से बेटरमेंट लेवी ली जाएगी।
* स्थानीय निकायों से कम्पलीशन सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही मिल सकेंगे पानी, बिजली, सीवरेज और टेलीफोन के स्थायी कनेक्शन।
* बहुमंजिला भवनों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर, नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुसार अग्निशमन, भूकंपरोधी तकनीक, नियमानुसार ग्रीनरी और प्लांटेशन तथा पर्याप्त पार्किग सुविधा अनिवार्य होगी।
* साइड सेटबैक में भी मेकेनिकल पार्किग की मंजूरी दी जा सकेगी।
शहर का व्यवस्थित विकास होगा:
* नए बिल्डिंग बाइलॉज बनने से मैट्रो सिटी की तरह जयपुर शहर का भी व्यवस्थित विकास हो सकेगा। नियमों में हालांकि अभी भी सड़क की चौड़ाई का डेढ़ गुना तक बिल्डिंग की ऊंचाई ले जाने के प्रावधान तो अभी भी है, लेकिन व्यवहारिक तौर पर इसका पालन नहीं हो रहा है। हैरिटेज महत्व की और सुरक्षा की दृष्टि से प्रतिबंधित सड़कों बहुमंजिला इमारतों की इजाजत नहीं मिलने से बाहरी क्षेत्रों का ज्यादा विकास होगा।
-गोपाललाल गुप्ता, अध्यक्ष बिल्डर्स एसोसिएशन।
जल्दी जारी होंगे नए बिल्डिंग बाइलॉज
* मंत्रिमंडलीय उप समिति की ओर से दिए गए सुझावों को बिल्डिंग बाइलॉज में शामिल किया गया है। राज्यमंत्रिमंडल ने इसे मंजूरी दे दी है। इसके आदेश एक-दो दिन में जारी कर दिए जाएंगे।
-परविंदरसिंह पंवार, प्रमुख सचिव, स्वायत्त शासन एवं नगरीय विकास विभाग