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कैंसर की जड़ मांसाहार

वाशिंगटन/जयपुर. यह बात सिद्ध हो चुकी है कि शाकाहारियों के मुकाबले मांस खाने वालों में कैंसर की आशंका अधिक होती है। यह तथ्य सामने आया है दुनिया में vegetableकैंसर पर हुए एक अध्ययन में। अध्ययन वर्ल्ड कैंसर रिसर्च फंड ने अमेरिकन इंस्टीट्यूट फॉर कैंसर रिसर्च के साथ मिलकर किया है। इसमें हजारों लोगों को शामिल किया गया और लगातार पांच साल तक स्टडी चलती रही। अध्ययन में कैंसर का मुख्य कारक जो सामने आया, वह था ‘मांस’। यद्यपि इस तरह की कई रिपोर्ट्स और स्टडीज काफी समय से सामने आ रहीं थीं कि मांस और कैंसर का गहरा नाता है, किंतु अब यह सिद्ध हो चुका है कि मांस खाने वालों में कैंसर होने के चांस कई गुना ज्यादा होते हैं..खासतौर पर लाल मांस खाने वालों में।

लाल मांस यानी कैंसर को न्योता : यदि आप बकरे, भैंस, सूअर का मीट (लाल मांस) खाते हैं तो आपको अपने स्वास्थ्य को लेकर सतर्क होने की जरूरत है। लाल मांस स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि लाल मांस और आंतों के कैंसर के बीच सीधा संबंध तो सामने नहीं आया है, लेकिन इतना अवश्य मालूम चला है कि लाल मांस के अत्याधिक सेवन से कैंसर का खतरा बढ जाता है।

मांसाहार को नकारते किस्से
मांस का ट्रेंड जहां तेजी से बढ़ रहा है, वहीं बिश्नोई समुदाय ऐसा है, जिसमें मांस के सेवन पर सख्त पाबंदी है। मान्यता है कि बिश्नोई समुदाय के धर्म गुरु जंभेवश्वर को जीवों से प्रेम था। समाज को सद्मार्ग पर ले जाने के लिए उन्होंने 29 नियम बनाए थे। इनमें जीवों पर दया और शाकाहार शामिल है। इसी वजह से समाज का कोई व्यक्ति मांस नहीं खाता।

नागौर में सूफी हमीदुद्दीन नागौरी की दरगाह पर कोई भी मांस खाकर नहीं जाता है। अगर कोई ऐसा करता है तो उसे परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सूफी के जीवनकाल में एक गर्भवती गाय का शिकार करने वाले लोगों से उन्होंने गाय की जान बख्श देने को कहा। शिकारियों ने एक नहीं सुनीं। इसके बाद से ही उन्होंने शाकाहार अपना लिया।

जो जीभ से पानी पिए वही मांसाहारी
प्रकृति ने मांसाहारी व शाकाहारियों के लिए अलग पहचान बनाई है। जो जीभ से पानी पीते हैं- जैसे शेर, कुत्ता, बिल्ली वे मांसाहारी और जो मुंह से पानी पीते हैं, जैसे हाथी, गेंडा, बकरी, मनुष्य वे शाकाहारी। प्रकृति के इस नियम को किसी भी जानवर ने नहीं तोड़ा। केवल मनुष्य है जो नियम तोड़कर मांस खाता है।

अब तो मान जाइए
* हम कैंसर रोगियों को शाकाहार की सलाह देते हैं। मांसाहार में फाइबर न होने से आंतों में कॉम्पलिकेशन आ जाती हैं। इनसे कैंसर फैलता है।
-डॉ. हेमंत मल्होत्रा कैंसर विशेषज्ञ, एसएमएस अस्पताल, जयपुर

* कई मेडिकल रिसर्च में यह सामने आया है कि लाल मांस खाने वालों में कैंसर की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। इसलिए हम कैंसर रोगियों को मांस खाने से मना करते हैं।
-डॉ. अजय बापना वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ, भगवान महावीर कैंसर अस्पताल, जयपुर

* सुश्रुत संहिता के निदान स्थान अध्याय-11, श्लोक 17 में स्पष्ट है कि मांस लोलुप मनुष्य का मांस दूषित होने से मांस अबरुद (गांठ) बनता है।
-जगदीश शर्मा, प्राचार्य, मालवीय आयुर्वेद कॉलेज, उदयपुर

* मांस सेवन से रक्त वाहिकाओं में कॉलेस्ट्रोल जम जाता है और हार्ट ठीक से ब्लड सप्लाई नहीं करता है। नतीजन स्किन व किडनी कैंसर की आशंका रहती है।
-अर्चना जैन, डायटिशियन

जयपुर में रोज 200 टन मांस की खपत
जयपुर में मांस की करीब 2500 दुकानें हैं। इनमें से वैध केवल 430 ही हैं। इन दुकानों में रोज दो हजार क्विंटल (200 टन) से अधिक मांस बिकता है। नगर निगम के चैनपुरा बूचड़खाने में प्रतिदिन 70 से 100 बकरे कटते हैं। इसके अतिरिक्त 5 हजार से ज्यादा बकरे और करीब 2000 भैंसे (पाडे) रोजाना अवैध रूप से काटे जाते हैं। शहर में 9 हजार से ज्यादा मुर्गों की दैनिक खपत है। मांस व्यापार को कंट्रोल करने के लिए निगम के पास केवल दो इंस्पेक्टर हैं, जबकि मांस की खपत के अनुसार जयपुर में 12 इंस्पेक्टर होने चाहिए। फाइव स्टार होटलों में मांस बाहर से भी आता है। डिब्बाबंद मांस की बिक्री इससे अलग है।

आइए अपनाएं शाकाहार
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने बढ़ते मोटापे के खिलाफ मुहिम चलाने का फैसला किया है। इसके तहत लोगों को पैदल चलने, नियमित व्यायाम और शाकाहार के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

अपनाएं कैसे
हरी सब्जियां और फल ज्यादा से ज्यादा खाएं। जितना ज्यादा संभव हो पैदल चलें। इससे फेट लॉस होगा और प्रदूषण भी कम होगा।

शाकाहार क्यों
मांसाहार से कैंसर का खतरा रहता है। अगर बीमार जानवर का मांस खा लिया तो कैंसर तय है। ऐसे में स्वस्थ और सुखी रहने के लिए शाकाहार के अलावा कोई विकल्प नहीं है। फायदे होंगे मुफ्त में।

जिम्मेदारी कौन ले
घर में शाकाहार लाने के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी महिलाओं की है। सबसे पहले घर में मांस पकाने पर कड़ा प्रतिबंध लगाएं। होटल में ऐसा कुछ खाने का प्रस्ताव रखा जाए तो साथ जाने से साफ इनकार करें।

निभाएं सौ प्रतिशत
कोई भी रिसर्च आने पर अक्सर मांसाहार कम करने की कसम खाई जाती है। कम होता नहीं। पूरी तरह छोड़ने पर ही टलेगा संकट।





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