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फिर जीत की ओर मोदी

अहमदाबाद. अगले माह होने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा 2002 के प्रदर्शन को दोहरा तो नहीं पाएगी, अलबत्ता सीटों के शतक के साथ लगातार तीसरी बार राज्य में भाजपा की सरकार बन सकती है।

दिव्य भास्कर और आईबीएन-7 के चुनाव पूर्व सर्वे के नतीजे ऐसे ही संकेत कर रहे हैं। सर्वे के नतीजों के अनुसार, 182 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा को पांच फीसदी वोटों के नुकसान के बावजूद 100, एक फीसदी वोटों के फायदे के साथ कांग्रेस को 76 और अन्य दलों को छह सीटें मिलने का अनुमान है।

अगर भाजपा के वोट चार फीसदी और घट जाएं तो भाजपा और कांग्रेस 88-88 सीटों के साथ बराबरी की स्थिति में आ जाएंगी। ऐसे में सरकार बनाने में छह अन्य सदस्यों की भूमिका अहम हो जाएगी। सर्वे नवंबर के पहले सप्ताह में किया गया था। इसमें 60 विधानसभा क्षेत्रों के 240 शहरी और ग्रामीण इलाकों के कुल 3,779 मतदाताओं की राय ली गई।

भाजपा के वोट घटे, कांग्रेस के बढ़े :

सर्वे के मुताबिक भाजपा को वोट शेयर के मामले में पिछले चुनाव की तुलना में घाटा उठाना पड़ रहा है। इस बार भाजपा को 45 फीसदी वोट (2002 की तुलना में पांच फीसदी का नुकसान), कांग्रेस को 40 फीसदी (़एक फीसदी का फायदा) और अन्य को 15 फीसदी वोट (़चार फीसदी का फायदा) मिल सक ते हैं। पिछले तीन चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के बीच 9 से 11 फीसदी वोटों का अंतर रहा था। पिछले तीन चुनावों के लिहाज से इस चुनाव में भाजपा को सबसे कम वोट मिलने के आसार हैं।

सर्वे का महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि कांग्रेस का गढ़ रहे दक्षिण गुजरात में भाजपा के पक्ष में 6 फीसदी का स्विंग नजर आ रहा है, जबकि सौराष्ट्र में भाजपा की लीड एक फीसदी घट रही है। उत्तर और मध्य गुजरात में भी भाजपा के वोट और सीटें कम होने के आसार हैं।वर्तमान विधानसभा में भाजपा के 127, कांग्रेस के 51 और अन्य के चार सदस्य हैं।

कार्यशैली तानाशाह सरीखी, फिर भी मोदी हीरो नंबर वन

पिछले तीन मुख्यमंत्रियों में नरेंद्र मोदी का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा है। राज्य के 40 फीसदी लोगों ने मोदी के कामकाज को बेहतर माना है। दूसरे नंबर पर शंकर सिंह वाघेला (नौ फीसदी) और तीसरे नंबर पर केशुभाई पटेल (चार फीसदी) रहे। मोदी सरकार के कामकाज से 63 फीसदी लोग संतुष्ट हैं और मात्र 24 फीसदी असंतुष्ट। इसके बावजूद 34 फीसदी लोग यह भी मानते हैं कि मोदी की शैली तानाशाह सरीखी है।

लोगों पर मोदी की छाप : * जब लोगों से मोदी और केशुभाई पटेल में एक को बेस्ट लीडर चुनने को कहा गया तो 48 फीसदी ने मोदी और 19 फीसदी ने पटेल को नेता चुना।

* भाजपा के 81 फीसदी लोगों ने मोदी और आठ फीसदी ने पटेल को बेस्ट लीडर माना।

* मोदी और वाघेला में से भी 47 फीसदी लोगों ने मोदी को बेस्ट लीडर चुना। 53 फीसदी कांग्रेसियों ने वाघेला को और 10 फीसदी ने मोदी को बेस्ट लीडर चुना।

* 56 फीसदी लोग मानते हैं कि मोदी के रूप में गुजरात को एक प्रभावशाली नेता मिला है। सिर्फ 22 फीसदी लोग ही इससे असहमत हैं।

*52 फीसदी लोगों का मानना है कि मोदी ने गुजरात का सम्मान बढ़ाया है। सिर्फ 23 फीसदी लोग इससे असहमत। गोधरा कांड भूलना चाहते हैं लोग : सर्वे में 72 फीसदी लोगों ने गोधरा कांड को भूल जाने पर जोर दिया। इन लोगों का कहना था कि 2002 में हुई यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण थी। गत पांच साल में ऐसा मानने वालों की संख्या में पांच फीसदी का इजाफा हुआ है। इसी प्रकार गोधरा कांड के बाद भड़के दंगों में जो कुछ घटित हुआ, उसे बिल्कुल गलत मानने वालों की तादाद भी पांच साल में72 फीसदी के मुकाबले 17 फीसदी गिर कर 55 फीसदी पर आ गई है। राज्य में अल्पसंख्यकों को लेकर कानून-व्यवस्था की स्थिति को चिंताजनक मानने वालों की तादाद 31 फीसदी है, जबकि 18 फीसदी ने विपरीत राय प्रकट की।





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