सोनीपत. सिविल अस्पताल स्थित रेडक्रास के ब्लड बैंक में आने वाले मुफ्त के खून में कुछ सेंपल एचआईवी संक्रमित भी निकले हैं। जिससे न केवल ब्लड बैंक के अधिकारी, कर्मचारी ही चिंतित हैं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की भी चिंताएं बढ़ गई हैं। इसी साल अभी तक पन्द्रह यूनिट ब्लड एचआईवी से संक्रमित पाया गया है। यही नहीं इतनी ही संख्या हेपेटाइटिस बी के रोगियों की भी है।
क्या करते हैं संक्रमित ब्लड का :
ब्लड बैंक के अधिकारी संक्रमित खून को नष्ट कर देते हैं। उसे या तो जला दिया जाता है या फिर उसे मिट्टी में दबा दिया जाता है। संक्रमित रक्त को हाथ लगाने से भी अधिकारी व कर्मचारी डरते हैं। जिले में अभी तक स्वेच्छा से रक्त देने वाले एक सौ सत्तर के करीब लोग संक्रमित मिले हैं। हालांकि अभी तक इनकी पहचान नहीं हुई है।
ब्लड बैंक में ब्लड पहुंचने के बाद यह पता नहीं चलता है कि संक्रमित ब्लड किस व्यक्ति का है। स्वास्थ्य विभाग सूत्रों के मुताबिक प्रदेशभर में चालीस हजार के करीब लोग एचआईवी पाजिटिव हैं। सोनीपत जिले में भी दो हजार के करीब लोगों का पता चल चुका है। गुड़गांव में एचआईवी पाजिटिव की संख्या सर्वाधिक है। हेपेटाइटिस-बी भी एड्स से कम खतरनाक नहीं है। सिविल अस्पताल के डा. जेएस पूनिया का कहना है कि एड्स की तरह हेपेटाइटिस बी भी रक्त से लगने वाली संक्रामक बीमारी है।
जिले में इन मरीजों की संख्या काफी बढ़ रही है। इसका अभी तक कोई इलाज नहीं आया है। अभी तक हेपेटाइटिस ए, ई तथा सी का ही इलाज है। ये तीनों पानी जनित बीमारी हैं, जिनका इलाज अब संभव है।
जिले में अभी तक दो हजार एचआईवी पाजिटिव व्यक्तियों का पता चला है। दान के ब्लड के पांच टेस्ट किए जाते हैं। इनमें से एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, सी, वीडीआरएल तथा मलेरिया। संक्रमित ब्लड को वे नष्ट करने के अलावा कुछ नहीं कर सकते। जिले में एड्स से बचने के लिए कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। जिनका काफी अच्छा परिणाम आ रहा है।
-डा. एपी गुलिया, कार्यवाहक सीएमओ एवं जिला स्वास्थ्य अधिकारी सोनीपत