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नई दिल्ली. हर समय चर्चा में रहने वाला तिहाड़ जेल इस बार आर्थिक अनियमितताओं को लेकर सुर्खियों में है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का आरोप है कि एशिया के सबसे बड़े इस जेल में स्थित औद्योगिक इकाइयां काफी मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन उनमें काम करने कैदी कामगारों को मजदूरी काफी कम दी जा रही है। आयोग ने अब जेल की औद्योगिक इकाइयों के आय-व्यय का विस्तृत ब्यौरा मांगा है।
यह मामला तब प्रकाश में आया, जब आयोग के मानद सदस्य चमन लाल 22 अक्टूबर को जेल में मानवाधिकारों पर व्याख्यान देने गए। जेल की औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले कामगारों ने लाल को बताया कि उन्हें काम करने के एवज में 12 से 30 रुपए रोजाना दिए जाते हैं, जबकि जेल प्रशासन इन इकाइयों से भारी धन कमा रहा है।
इस जानकारी के बाद आयोग ने मजदूरी के पुनर्निर्धारण की जरूरत बताते हुए स्वत: संज्ञान लिया और महानिदेशक (जेल) बीके गुप्ता को एक पत्र भेज कर निर्देश दिए गए हैं कि वे जेल की औद्योगिक इकाइयों की आय और व्यय का विस्तृत ब्योरा चार हफ्ते में पेश करें।
आयोग ने इस बात की स्पष्ट जानकारी चाही है कि औद्योगिक इकाइयों में काम करने वालों को कितने रुपए मजदूरी के रूप में दिए जाते हैं और लाभान्वित होने वाले कैदियों की संख्या कितनी है।
एक अनुमान के अनुसार लगभग 300 कैदी जेल की औद्योगिक इकाइयों में फर्नीचर, बुनाई, सिलाई, बेकिंग और कागज आदि बनाने का काम करते हैं। यहां के उत्पाद विभिन्न सरकारी महकमों और खुले बाजार में बेचे जाते हैं।