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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. पिथौरा इलाके के 400 से ज्यादा मजदूरों को परिवार सहित छत्तीसगढ़ से बाहर भेजे जाने की कोशिश श्रम विभाग और पुलिस ने नकाम कर दी। तीन कंटेनरों को जब्त कर तमाम मजदूर छुड़ा लिए गए। इसके पीछे चार दलालों के नाम आए हैं। उनके खिलाफ श्रम विभाग ने अंतरराज्यीय प्रवासीय कर्मकार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।
बताते हैं, सूचना पर श्रम अधिकारियों और तेलीबांधा पुलिस ने चौराहे पर नाकेबंदी कर रखी थी। दोपहर में बोलेरो एनएल01डी2117 को पकड़ा गया। इसमें दर्जनभर श्रमिक थे।पूछताछ में चालक मजहर खान ने बताया कि उनके पीछे तीन बंद कंटेनर में मजूदर लाए जा रहे हैं। उसके बाद मजहर की निशानदेही में तीनों कंटेनर (एनएल 01 डी 4119, एनएल 01 डी 4188 और एनएल 01 डी 4120) को घेरा गया।
तीनों में महिला, पुरुष और बच्चे खचाखच भरे हुए थे। एक-एक कंटेनर में 100-100 से ज्यादा लोग ठूंसे गए थे। इनके चालक शाहिद खान, शहनाज खान और राधेश्याम के अलावा बोलरो चालक मजहर को पुलिस ने बंदी बना लिया है। कंटेनर चालक झारखंड के बताए गए हैं। उन पर पुलिस ने मोटरव्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई की है। सभी मजदूरों को वहां उतारा गया।
पूछताछ में पता चला कि इसके पीछे पिथौरा के श्रमिक ठेकेदार मुकेश अग्रवाल, मकसूद अहमद, संजय अग्रवाल और लक्ष्मीनारायण अग्रवाल है। वेलफेयर लेबर कमिश्नर सविता मिश्रा ने बताया कि यह ‘अंतरराज्यीय प्रवासीय कर्मकार अधिनियम’ के तहत आपराधिक मामला है। इसकी सुनवाई लेबर कोर्ट में होगी। दोषी पाए जाने पर आरोपियों को जेल भी हो सकती है।
कंटेनर चालकों ने पुलिस को बताया कि कोलकाता से माल खाली कर पुणो लौट रहे थे। पिथौरा में वे रुके हुए थे। इसी दौरान श्रमिक ठेकेदार मुकेश अग्रवाल ने उनसे बात की और मजदूरों को दुर्ग तक छोड़ने सौदा किया। बताते हैं, वहां से मजदूरों को ट्रेन से इलाहाबाद या उत्तरप्रदेश के किसी इलाके की ईंट भट्ठियों में पहुंचाया जाता।
श्रमिक वापस भेजे गए
श्रम विभाग ने सारे बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराने के बाद अपनी कस्टडी में लेकर उनसे पूछताछ की। विभाग ने कार्रवाई की औपचारिका पूरी करने के बाद रात 9 बजे तक तीन-चार वाहनों से उनके गांव वापस भिजवा दिया।
क्या हैं नियम
श्रम अधिकारियों ने बताया कि श्रमिकों को बिना अनुमति दूसरी जगह ले जाना जुर्म है। पांच अथवा इससे अधिक श्रमिकों को ले जाने के लिए ठेकेदार को लाइसेंस लेना पड़ता है। उनके नामों की सूची श्रम विभाग देनी होती है। साथ ही प्रत्येक श्रमिक के हिसाब से 150 रुपए सुरक्षा निधि भी जमा करनी होती है।
पलायन की त्रासदी
छत्तीसगढ़ में पलायन का सिलसिला अब भी जारी है। रोजगार गारंटी योजना लागू होने के बाद भी ज्यादा मजदूरी की लालच में परिवार सहित श्रमिक परिवार विस्थापित हो रहे हैं। इन्हें दूसरे राज्यों में भेजने दलाल सक्रिय हैं। रेलवे स्टेशनों पर इनका रेला कभी भी देखा जा सकता है।
अलबत्ता कार्रवाई यदाकदा होती है। दूसरे राज्यों के बाहर इन्हें बंधुआ मजदूरों की तरह रखा जाता है। कई ऐसे मामले आए हैं, जब मुसीबत में फंसे श्रमिकों कर्ो ईट भट्ठे के मालिकों के चुंगल से बचाने प्रशासन को मशक्कत करनी पड़ी।