इंदौर.
न हम सरकार गिराएंगे, न ही अमेरिका के साथ परमाणु करार होने देंगे। नंदीग्राम में 14 लोग मारे जा चुके हैं लेकिन इसका कारण जमीन विवाद नहीं वर्ग संघर्ष है। ऐसा माकपा को वहां से हटाने के लिए किया जा रहा है। पांच गांवों का मुद्दा नेशनल इश्यू नहीं हो सकता। यह बात मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राष्ट्रीय महासचिव प्रकाश करात ने गुरुवार को इंदौर में अलग-अलग कार्यक्रमों में दोहराई।
परमाणु करार को लेकर सरकार और यूपीए के घटक दलों के बीच शुक्रवार को दिल्ली में होने वाली बैठक के संदर्भ में उन्होंने कहा ज्यादातर पार्टियां इसके खिलाफ हैं और संसद में भी इस राय का बहुमत है। ऐसे में इसे लागू करने की कोशिश करना अनुचित है। ‘फिर वोटिंग करवाकर इसे खारिज क्यों नहीं कर रहे हैं?’ जवाब था इससे सरकार गिर जाएगी। हमारी पूरी कोशिश है गुरुवार से शुरू शीतकालीन सत्र में संसद में बहस हो।
इसके लिए हम प्रमुख विपक्षी दल भाजपा से भी अपील करते हैं। पहले परमाणु करार का विरोध करते रहे और नंदीग्राम की घटना के बाद सरकार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी (आईएई) से बात करने की अनुमति दे दी? जवाब में उन्होंने कहा बात करने की अनुमति नहीं दी है बल्कि शुक्रवार को तय करेंगे सरकार उनसे किन मुद्दों पर क्या बात करना चाहती है।
नंदीग्राम: दासमुंशी की वजह से मामला बढ़ा
श्री करात ने कहा नंदीग्राम में तीन सौ लोगों के मारे जाने की बातें की जा रही हैं लेकिन नाम एक भी व्यक्ति का नहीं दे पाए। दरअसल ये लोग वहां की जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं। हमने सीआरपीएफ तैनात करने की मांग की तो केंद्रीय मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी ने इंकार कर दिया। इसी वजह से मामला एक हफ्ते अटका रहा और पूरा क्षेत्र हिंसा का शिकार हो गया। तीन दिन से सीआरपीएफ तैनात है और स्थिति सामान्य हो रही है।