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फिर गया अरमानों पर पानी

ग्वालियर. why चेहरे पर तिरंगा, सिर पर कैप, कोई इंडिया टीम की ड्रेस पहने था तो कोई पूरे शरीर पर तिरंगा ही लपेटकर आया था। स्टेडियम के आसपास का यह दृश्य देखकर अंदाजा लगाया जा सकता था कि दर्शक मैच को लेकर कितने उत्साहित और जोश से भरे थे। बहुत सारे दर्शकों का यह उत्साह दोपहर 1.30 बजे के बाद उस समय उदासी में बदल गया, जब उनके पास टिकट होने के बाद भी स्टेडियम में घुसने नहीं दिया गया।

ऐसे टिकटधारी प्रवेश की जुगाड़ में लगे ही थे कि पुलिस कर्मियों ने लाठीचार्ज प्रारंभ कर दिया। पुलिस ने महिलाओं को भी नहीं बख्शा। इसके बाद हाथ में 2000 और 3000 का टिकट पकड़े उच्च वर्गीय लोगों को भी उदास मन से मैच देखे बिना वापस जाना पड़ा। स्टेडियम के पास मौजूद भास्कर टीम ने ऐसे दर्शकों से बात की।

महाराष्ट्र से आई थीं मौसी
लाठीचार्ज से बचने के लिए एक तरफ कोने में खड़े आहूजा परिवार के सभी सदस्य उदास थे। सबसे ज्यादा दुख उन्हें अपनी मौसीजी के परिवार को मैच न दिखा पाने का हुआ क्योंकि मौसी अपने परिवार के साथ महाराष्ट्र से विशेष रूप से यहां आईं हुई थीं। उनका कहना था कि जब स्टेडियम की बैठक क्षमता कम थी तो टिकट अधिक क्यों बांटे गए?

यहां से वहां भटकाती रही पुलिस
कुछ लोग ऐसे भी थे जो उच्च परिवारों से वास्ता रखते थे लेकिन इनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। कलेक्टर से लेकर पुलिस अफसरों तक ऐसे लोग जिसके पास भी जाते वे सिर्फ उन्हें यहां से वहां भटकाते रहते। आखिर में वे थककर वापस घर चले गए लेकिन उनका सवाल यही था कि ‘जब उनके पास टिकट हैं तो आखिर क्यों उन्हें सुरक्षा कर्मचारी गेट से दूर हटा रहे हैं। ये तो जनता को ठगना हुआ’

इंतजार करते बीते दो घंटे
अपने दो मासूम बच्चों को स्टेडियम मैच दिखाने पहुंचे अरविंद तिवारी तो वहां का माहौल देखकर ही घबरा गए पहले उन्हें लगा कि उन लोगों को गेट से दूर भगाया जा रहा है जिनके पास टिकट नहीं हैं। लेकिन उन्हें अचरज तब हुआ जब टिकट होने पर भी उन्हें अंदर नहीं घुसने दिया गया। वे बताते हैं कि बच्चों ने इंडिया टीम जैसी ड्रेस और कैप उत्साह में ले ली थी। दो घंटे बच्चों को गोदी में बैठाकर इंतजार किया लेकिन चुपचाप घर लौटना पड़ा।

आखिर क्यों खाएं डंडे
15 दोस्तों के ग्रुप के साथ खड़े आशीष और उनके दोस्तों का गुस्सा पूरे चरम पर था। क्रिकेट थीम पर तैयार होकर आए उन लोगों का कहना था कि धूप में खड़े होकर महंगे टिकट लिए थे तो फिर पुलिस के डंडे क्यों खाने को मिल रहे हैं? ट्रैफिक जाम के कारण पहुंचने में देरी हुई और जब दोपहर दो बजे स्टेडियम के गेट तक पहुंचने की कोशिश की तो पुलिसवालों ने भगाना शुरू कर दिया।

पुलिस ने खदेड़ा
क्रिकेट प्रेमी रामशरण लंबी कतार और इंतजार के बाद स्टेडियम के प्रवेश द्वार तक पहुंते तो वहां तैनात पुलिस कर्मियों ने उन्हें बैरंग बापस लौटा दिया। उन्होंने जब टिकट दिखाया तो पुलिस कर्मियों ने कहा टिकट भी ले जाओ और वापस अपने घर जाओ।





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